नाश्ते की टेबल पर कर्नाटक सत्ता संघर्ष समाधान की कोशिश
हाईकमान के आदेश पर सिद्धारमैया ने बुलाया शिवकुमार को CM आवास; दोनों नेताओं ने कहा- 'मानेंगे आलाकमान का फैसला'
- बैठक का उद्देश्य: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार सुबह हाईकमान के निर्देश पर कर्नाटक सत्ता संघर्ष समाधान पर चर्चा की।
- विवाद का केंद्र: कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद, कथित ‘सत्ता साझा समझौते’ (2.5 साल रोटेशन) को लागू करने की मांग ने विवाद को जन्म दिया है।
- आलाकमान का रुख: दोनों नेताओं ने दोहराया है कि वे पार्टी आलाकमान, यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अंतिम फैसले का पूरी तरह पालन करेंगे।
समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु, 29 नवंबर: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान को समाप्त करने के उद्देश्य से, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (डीकेएस) ने शनिवार सुबह बेंगलुरु में एक अहम बैठक की। यह मुलाकात सिद्धारमैया के आधिकारिक आवास ‘कावेरी’ में नाश्ते की टेबल पर हुई। कांग्रेस आलाकमान के सख्त निर्देश के बाद हुई इस बैठक को कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही सत्ता की तकरार को सुलझाने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
हाईकमान के दखल के बाद बुलाई गई बैठक
सिद्धारमैया सरकार के 20 नवंबर को ढाई साल पूरे होने के बाद से ही डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। इस बीच, दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे पर परोक्ष रूप से निशाना साधा, जिससे विवाद सार्वजनिक हो गया और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा।
मामला बढ़ता देख, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार शाम दोनों नेताओं को फोन कर सार्वजनिक बयानबाजी से बचने और आपसी मतभेद सुलझाने का कड़ा संदेश दिया। इसके बाद शुक्रवार को सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से डीके शिवकुमार को नाश्ते पर आमंत्रित किया। सिद्धारमैया ने कहा, “आलाकमान ने हमें बात करने को कहा है, इसलिए मैंने उन्हें बुलाया है। हम दोनों ने यह साफ कर दिया है कि हम आलाकमान के हर फैसले का पालन करेंगे।”
नाश्ते की टेबल पर क्या बनी बात?
सीएम आवास पर यह नाश्ता बैठक लगभग एक घंटे तक चली। हालांकि, बैठक के बाद दोनों नेताओं की तरफ से विवाद के समाधान को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों नेताओं ने ‘ढाई साल के फार्मूले’ और राज्य की स्थिरता को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे।
सिद्धारमैया का रुख: मुख्यमंत्री खेमा यह तर्क दे रहा है कि चूंकि उन्हें ओबीसी, दलितों और अल्पसंख्यकों का बड़ा समर्थन प्राप्त है और सरकार अच्छा काम कर रही है, इसलिए उन्हें पूरे पांच साल का कार्यकाल दिया जाना चाहिए ताकि कल्याणकारी योजनाओं पर कोई असर न पड़े।
डीकेएस का रुख: शिवकुमार के समर्थक यह जोर दे रहे हैं कि पार्टी की जीत में डीकेएस (वोक्कालिगा समुदाय के मजबूत नेता) की अहम भूमिका थी और आलाकमान द्वारा किया गया ‘सीक्रेट डील’ का वादा पूरा किया जाना चाहिए।
डीके शिवकुमार ने बैठक से पहले अपने समर्थकों की इच्छाओं को स्वीकार करते हुए भी कहा, “कार्यकर्ता उत्साहित हो सकते हैं, लेकिन मुझे कोई जल्दी नहीं है। पार्टी सारे फैसले लेगी।”
आगे क्या? गेंद अब दिल्ली दरबार में
नाश्ते पर मुलाकात खत्म होते ही उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि वह संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे।
कांग्रेस हाईकमान अब दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा पर विचार करेगा। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, 30 नवंबर को संसद सत्र से पहले होने वाली पार्टी की रणनीति समूह की बैठक के बाद इस संकट पर केंद्रीय नेताओं द्वारा व्यापक चर्चा किए जाने की संभावना है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा है कि कांग्रेस नेतृत्व के पास इस मामले को सुलझाने के लिए ‘सही समय की समझ’ है।
फिलहाल, इस विवाद का अंतिम फैसला दिल्ली के ‘हाईकमान’ के हाथ में है, और कर्नाटक की राजनीति में अगले कुछ दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं।