उबर ड्राइवर पर दिल्ली में महिला से मारपीट का आरोप
डॉक्टर के पास जा रहीं पर्यावरण कार्यकर्ता भारती चतुर्वेदी ने बताया—ड्राइवर ने सुनसान रास्ते में गाड़ी मोड़ी, हाथ मरोड़ा और पुलिस-उबर दोनों ने तुरंत मदद नहीं की।
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उबर राइड के दौरान महिला ने ड्राइवर पर हाथ मरोड़कर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया
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सही रूट न पकड़ने पर ड्राइवर ने कार सुनसान लेन में मोड़ दी, उतरते वक्त हाथ पकड़कर झटका
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100 नंबर और उबर सुरक्षा को कॉल करने के बावजूद कोई तत्काल सहायता नहीं
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पोस्ट वायरल होने के बाद उबर ने ड्राइवर को ऐप से हटाया, दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 28 नवंबर: दिल्ली में एक महिला यात्री के साथ उबर राइड के दौरान हुई मारपीट की घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता और चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप की संस्थापक भारती चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर विस्तृत पोस्ट शेयर कर बताया कि डॉक्टर के पास जाते समय उनकी उबर राइड अचानक एक भयावह अनुभव में बदल गई।
चतुर्वेदी के मुताबिक, ड्राइवर पहले तो तय ड्रॉप लोकेशन से दूर रुकने लगा और सही रूट अपनाने की बात कहने पर आक्रामक हो गया। उसने तेज रफ्तार में गाड़ी मोड़कर उन्हें एक सुनसान लेन की ओर ले गया। जब उन्होंने गाड़ी रोकने और उतरने की कोशिश की, तो ड्राइवर ने एक हाथ स्टीयरिंग पर रखते हुए उनका हाथ मरोड़ दिया, जिससे वह घबरा गईं। किसी तरह दरवाज़ा खोलकर वह बाहर निकलीं और ऑटो लेकर अपनी अपॉइंटमेंट की ओर चली गईं।
उन्होंने लिखा कि दिल्ली की जहरीली हवा और अस्थमा की समस्या से पहले ही सांस लेने में दिक्कत थी, लेकिन घटना के बाद सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह रही कि आपातकालीन सेवाएँ भी समय पर मदद नहीं कर सकीं। उनका दावा है कि 100 नंबर पर कॉल और उबर सुरक्षा दोनों से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं ड्राइवर उन्हें ताने मारता रहा और कहता रहा, जाओ, पुलिस बुलाओ।
घटना पर कार्रवाई तब शुरू हुई जब उनकी पोस्ट X और लिंक्डइन पर वायरल हुई। इसके बाद उबर ने बयान जारी कर कहा कि यह व्यवहार उनके समुदाय दिशानिर्देश का गंभीर उल्लंघन है और ड्राइवर को तुरंत प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि ऐप में मौजूद SOS फीचर सीधे पुलिस से जोड़ता है और आपात स्थिति में इसका उपयोग करना चाहिए।
दक्षिण दिल्ली के डीसीपी ने भी शिकायत की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चतुर्वेदी ने इसे “माइनर पेन, मेजर एंगर” बताते हुए लिखा कि यह घटना दिखाती है कि महिलाएँ आज भी सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और कॉरपोरेट प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह निर्भर रहना संभव नहीं।