इमरान खान जिंदा हैं? क्यों चुप्पी साधे हैं मुनीर और शहबाज, नवाज ने किसे बताया क्रिमिनल
पूर्व प्रधानमंत्री की मौत की खबरों से पाकिस्तान में हड़कंप, PTI समर्थकों का जेल के बाहर जमावड़ा; नवाज़ बोले—इमरान को सत्ता में पहुँचाने वाले सबसे बड़े अपराधी।
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इमरान खान की कथित मौत की अफवाहों से पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज।
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PTI समर्थक जेलों के बाहर जमा, इमरान की बहनों ने पुलिस पर हमले का आरोप लगाया।
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नवाज़ शरीफ ने कहा, इमरान अकेले गुनाहगार नहीं, उन्हें सत्ता देने वाले असली बड़े अपराधी।
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2018 चुनाव में PTI सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी; शहबाज़ ने तब भी धांधली के आरोप लगाए थे।
समग्र समाचार सेवा
इस्लामाबाद, 27 नवंबर: पाकिस्तान इन दिनों गहरी राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर अचानक फैली मौत की अफवाहों ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर अनिश्चित दावों और वायरल पोस्ट्स ने PTI समर्थकों को उकसाया, जिसके चलते सैकड़ों लोग रावलपिंडी की अडियाला जेल समेत कई केंद्रीय जेलों के बाहर जमा हो गए। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को भारी सुरक्षा तैनात करनी पड़ी।
इसी बीच इमरान खान की तीन बहनों ने गंभीर आरोप लगाया कि जब उन्होंने जेल प्रशासन से मुलाकात की अनुमति मांगी, तो पुलिस ने उनके साथ “निर्दयतापूर्वक धक्का-मुक्की और मारपीट” की। परिवार का कहना है कि सरकार इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति छुपा रही है, जिसके कारण अफवाहों को और हवा मिल रही है।
अफवाहों और आम जनभावना के उफान के बीच, पूर्व प्रधानमंत्री और PML-N सुप्रीमो नवाज़ शरीफ़ का बयान नए विवाद की वजह बन गया। नवाज़ ने खुले शब्दों में कहा कि “इमरान खान सिर्फ एक मोहरा थे, असली अपराध उन लोगों ने किया जिन्होंने उन्हें सत्ता में बिठाया।” उन्होंने यह भी कहा कि देश की राजनीतिक तबाही की असल जवाबदेही “उन शक्तियों” की तय की जानी चाहिए जिन्होंने 2018 के चुनाव को दिशा दी।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, नवाज़ शरीफ़ ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से बातचीत के दौरान कहा कि “इमरान खान को सिर्फ एक अपराधी कहना गलत है; उनसे बड़े अपराधी वे लोग हैं जिन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया और पूरे सिस्टम को हाईजैक किया।” नवाज़ का यह संकेत साफ़ तौर पर पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना और खुफिया एजेंसियों पर जाता माना जा रहा है, जिन्होंने अतीत में कई बार सरकारें बनाने और गिराने में भूमिका निभाई है।
हालाँकि दूसरी ओर, पाकिस्तान चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि 2018 के आम चुनाव में PTI सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। 270 नेशनल असेंबली सीटों में से PTI ने 115 सीटें जीती थीं। यह परिणाम दर्शाता है कि जनता के बड़े हिस्से ने स्वयं इमरान खान को समर्थन दिया था। ऐसे में नवाज़ के बयान ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या वह जनता को दोषी ठहरा रहे हैं या पाकिस्तान की सेना को?
सवाल और इसलिए भी उठते हैं क्योंकि 2018 के चुनाव के तुरंत बाद, तब के विपक्षी नेता शहबाज़ शरीफ़ (जो आज प्रधानमंत्री हैं) ने बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि:
- देशभर में करीब 16 लाख वोट रद्द किए गए,
- कई जगहों पर गटरों और सड़कों से मतपत्र मिले,
- और कई पोलिंग स्टेशन पर फॉर्म-45 उपलब्ध ही नहीं थे।
PML-N का आरोप था कि चुनाव “प्री-प्लांड इंजीनियरिंग” का परिणाम थे, जबकि PTI ने इसे जनता का जनादेश बताया।
आज, जब इमरान खान जेल में हैं और उनकी सेहत पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हीं पुराने आरोपों की गूंज फिर दिखाई देती है। मुनीर, शहबाज़ और सेना नेतृत्व की चुप्पी ने भी शक और आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर सेना बनाम सिविलियन सत्ता की बहस में उलझती दिख रही है, और मौजूदा हालात इस देश की नाज़ुक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरे सवाल छोड़ रहे हैं।