SIR के खौफ से 500 अवैध बांग्लादेशी बंगाल से भागे

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से डरकर अवैध प्रवासी सीमा पर पकड़े गए; BSF ने सैकड़ों को हिरासत में लिया।

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  • पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद राज्य में रह रहे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मच गई है।
  • भारत छोड़कर बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे 500 से अधिक पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट पर रोका है।
  • पकड़े गए अधिकांश लोगों ने स्वीकार किया है कि वे वैध दस्तावेजों के बिना भारत में घरेलू सहायक और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे, और अब कानूनी कार्रवाई के डर से वापस लौट रहे हैं।

समग्र समाचार सेवा
उत्तर 24 परगना, 19 नवंबर: पश्चिम बंगाल में इन दिनों भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक अजीब और भयावह नज़ारा देखने को मिल रहा है। मतदाता सूची में संभावित बदलावों और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के डर से, सैंकड़ों अवैध बांग्लादेशी नागरिकों ने भारत छोड़कर वापस अपने देश भागने की कोशिश की है। उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर के पास स्थित हकीमपुर चेकपोस्ट पर ऐसी ही एक विशाल भीड़ जमा हो गई, जिसे बीएसएफ ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (जीरो लाइन) के पास रोका।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंबल और जरूरी सामान लेकर 500 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक—पुरुष, महिलाएं और बच्चे—सोमवार रात से ही जीरो लाइन के पास डेरा डाले हुए थे। वे नदी क्षेत्र के माध्यम से सीमा पार करके बांग्लादेश के सतखीरा जिले में लौटने की कोशिश कर रहे थे। बीएसएफ की 143वीं बटालियन के जवानों ने गश्त के दौरान इस गतिविधि को पकड़ा और पूछताछ के लिए समूह को हिरासत में ले लिया। सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष पकड़े गए अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों का यह सबसे बड़ा समूह है।

अवैध प्रवासियों ने कबूला सच

हिरासत में लिए गए लोगों में से कई ने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया कि उनके पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज़ नहीं है। उन्होंने दलालों के माध्यम से अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और कोलकाता के उपनगरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके अपना जीवन यापन कर रहे थे।

तकलीमा खातून नामक एक महिला ने बताया कि वह एक दशक से अधिक समय से किराए के मकान में रह रही थी और घरेलू सहायिका का काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई दस्तावेज़ नहीं है और अब वह सतखीरा (बांग्लादेश) लौटना चाहती हैं। अफसर खान जैसे अन्य लोगों ने भी कानूनी कार्रवाई के डर से भारत छोड़ने की मजबूरी जताई। सीमावर्ती जिलों जैसे उत्तरी 24 परगना, नदिया और कूचबिहार से भी ऐसे पलायन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

बीएसएफ की चौकसी और कार्रवाई

बीएसएफ ने सीमा पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है, खासकर नदी क्षेत्रों और बिना बाड़ वाले हिस्सों में, ताकि कोई भी अवैध रूप से सीमा पार न कर सके। बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए सभी प्रवासियों की पहचान की पुष्टि की जा रही है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके उंगलियों के निशान और तस्वीरें सहित बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी।

इसके बाद, इन अवैध प्रवासियों को बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) से संपर्क करके प्रत्यावर्तन (Repatriation) के लिए सौंपा जाएगा। अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस महीने की शुरुआत से अब तक सौ से अधिक बांग्लादेशियों को सीमा पार करने की कोशिश में पकड़ा जा चुका है, जो SIR प्रक्रिया के डर से उपजी भगदड़ को साफ दर्शाता है।

राजनीतिक विवाद का बढ़ना

SIR प्रक्रिया ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद को और भी तेज कर दिया है। बीजेपी का दावा है कि SIR से उन लाखों अवैध घुसपैठियों की पहचान करने में मदद मिलेगी जो मतदाता सूची में शामिल हो चुके हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे नागरिकों को डराने की केंद्र की चाल बता रही है। इस पलायन से यह स्पष्ट हो गया है कि बड़ी संख्या में गैर-दस्तावेजी लोग राज्य में अवैध रूप से रह रहे थे।

 

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