शिक्षा और कट्टरपंथ का विरोधाभास: कौन थीं डॉ. आफिया सिद्दीकी?

उच्च शिक्षा प्राप्त डॉक्टर का आतंकवाद की ओर रुझान: एक खतरनाक विरोधाभास

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  • डॉ. आफिया सिद्दीकी ने अमेरिका के एमआईटी (MIT) से न्यूक्लियर साइंस में मास्टर्स और पीएचडी की थी, जो उनकी असाधारण बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है।
  • अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में सहायक निदेशक जैसे बड़े पद और 5 बच्चों की मां होने के बावजूद, उन्होंने अपने परिवार को छोड़कर कट्टरपंथी विचारधारा को चुना।
  • अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने और आतंकवाद को समर्थन देने के गंभीर आरोपों में उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई, जो उच्च शिक्षा के बावजूद कट्टरता के शिकार होने का एक प्रमुख उदाहरण है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17 नवंबर: जब भी उच्च शिक्षित और प्रतिष्ठित करियर वाले लोगों के आतंकवाद की ओर आकर्षित होने की बात होती है, तो डॉ. आफिया सिद्दीकी का नाम हमेशा एक हैरान कर देने वाले विरोधाभास के रूप में सामने आता है। उनका जीवन एक पाकिस्तानी मूल की ऐसी असाधारण मेधावी छात्रा से शुरू हुआ, जिसने विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च मुकाम हासिल किया, लेकिन उसका अंत एक दोषी आतंकवादी के रूप में हुआ, जिसे अमेरिका में आजीवन कारावास की सज़ा मिली। उनकी कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि बुद्धि और शिक्षा का स्तर, व्यक्ति को अतिवादी विचारधारा के प्रभाव से मुक्त क्यों नहीं रख पाता।

न्यूक्लियर साइंस में सुनहरा सफर

आफिया सिद्दीकी की शैक्षणिक यात्रा किसी सुनहरे सपने से कम नहीं थी। अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर, उन्होंने प्रतिष्ठित आगा खान ट्रस्ट की स्कॉलरशिप प्राप्त की। इसी स्कॉलरशिप के सहारे उन्होंने दुनिया की सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से न्यूक्लियर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने न्यूरो-न्यूक्लियर साइंस में पीएचडी भी पूरी की।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में सहायक निदेशक (Assistant Director) का प्रतिष्ठित पद मिला। वह अमेरिका की उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में से थीं, जिन्हें यूरेनियम और अन्य संवेदनशील कलपुर्जे ले जाने की विशेष अनुमति प्राप्त थी। वह पार्ट-टाइम में दो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले छात्रों को न्यूक्लियर साइंस की व्यावहारिक जानकारी भी देती थीं। उनका करियर न केवल शानदार था, बल्कि उन्हें अमेरिकी वैज्ञानिक समुदाय में एक महत्वपूर्ण स्थान भी प्राप्त था।

कट्टरपंथ की ओर खतरनाक झुकाव

अपने उत्कृष्ट करियर, एक अमेरिकी साइंटिस्ट पति और पाँच बच्चों की बेहतरीन ज़िंदगी के बावजूद, डॉ. आफिया धीरे-धीरे अतिवादी विचारधारा के प्रभाव में आती चली गईं। यह बदलाव इतना गहरा था कि उन्होंने अपने वैज्ञानिक पति को तलाक दे दिया और खालिद शेख मोहम्मद (9/11 आतंकी हमले का प्रमुख मास्टरमाइंड) के आतंकवादी भतीजे से दूसरा निकाह कर लिया। अपनी नई कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित होकर, वह अमेरिका छोड़कर अफगानिस्तान चली गईं, जहाँ वह सक्रिय रूप से आतंकवादियों के साथ रहने लगीं।

आतंकी नेटवर्क में उनकी भूमिका बेहद खतरनाक थी। वह आतंकवादियों को परमाणु बम बनाने की ट्रेनिंग देने की फिराक में थीं। अमेरिकी जांच में यह खुलासा हुआ कि उन्होंने अपने घर पर इतना यूरेनियम जमा कर लिया था, जिससे एक छोटा-मोटा परमाणु बम बनाया जा सकता था। इतना ही नहीं, वह 9/11 के प्रमुख आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के संपर्क में भी थीं और उन्होंने तीन आतंकवादियों को अपने घर पर शरण भी दी थी।

गिरफ्तारी और आजीवन कारावास

आतंकवादियों के लिए न्यूक्लियर साइंस लैबोरेट्री बनाने के दौरान, अमेरिकी मरीन फोर्स ने उन्हें अफगानिस्तान में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान, डॉ. आफिया ने एक अमेरिकी सैनिक से 9 एमएम की पिस्तौल छीन ली और गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों का कत्ल हो गया।

अमेरिकी न्यायतंत्र ने डॉ. आफिया सिद्दीकी को उनकी आखिरी सांस तक जेल में रखने की सज़ा सुनाई। उनकी रिहाई के लिए पाकिस्तान सरकार के साथ-साथ कई आतंकवादी संगठनों ने भी बार-बार प्रयास किए हैं। सबसे प्रमुख प्रयास एक साल पहले टेक्सास के यहूदियों के पूजा स्थल सिनेगॉग में घुसकर बंधक बनाने की घटना थी, जहाँ बंधक बनाने वाले ने डॉ. आफिया सिद्दीकी की रिहाई की मांग की थी। डॉ. आफिया सिद्दीकी का मामला आज भी वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा का उच्चतम स्तर भी कट्टरपंथी विचारधारा के सम्मोहन से हमेशा नहीं बचा पाता।

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