समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 13 नवंबर -दिल्ली धमाके और फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने आतंक का एक नया चेहरा सामने आया है — महिलाओं के जरिए फैलाया जा रहा कट्टरपंथी नेटवर्क। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ से गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन सईद जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दिवंगत कमांडर उमर फारूक की पत्नी अफिरा बीबी के संपर्क में थी। यही अफिरा अब जैश की नई महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ की प्रमुख मानी जा रही है।
महिला विंग में गुटबाजी और योजना की विफलता
सूत्रों का कहना है कि अफिरा बीबी, डॉ. शाहीन और एक अन्य महिला के बीच जैश की महिला इकाई में गुटबाजी चल रही थी। इस गुटबाजी के कारण दिल्ली में एक बड़ी आतंकी योजना असफल हो गई। पार्टी (संगठन) के अंदर इस घटना से हलचल है और पाकिस्तान स्थित जैश नेतृत्व ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।
अफिरा बीबी: पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड की पत्नी
अफिरा बीबी, पुलवामा हमले के साजिशकर्ता और जैश कमांडर उमर फारूक की पत्नी है। उमर फारूक मसूद अजहर का भतीजा था और 2019 में पुलवामा हमले के बाद हुए एनकाउंटर में मारा गया था। पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद अफिरा ने संगठन में अपने पति की जगह ली और ‘जमात-उल-मोमिनात’ की सलाहकार परिषद (शूरा) में शामिल हुई।
सूत्र बताते हैं कि वह मसूद अजहर की छोटी बहन सादिया अजहर के साथ काम कर रही थी और दोनों भारत में महिला कैडर तैयार करने के लिए शाहीन सईद से लगातार संपर्क में थीं।
कट्टरपंथी महिलाओं की भर्ती की जिम्मेदारी
फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सीनियर डॉक्टर के रूप में कार्यरत शाहीन सईद को कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया। उसकी कार से असॉल्ट राइफलें, ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद हुए। जाँच एजेंसियों ने पाया कि शाहीन को जमात-उल-मोमिनात की भारत शाखा स्थापित करने और कट्टरपंथी विचारधारा वाली महिलाओं की भर्ती करने का काम सौंपा गया था।
मेडिकल पृष्ठभूमि में छिपा आतंकी चेहरा
लखनऊ की रहने वाली शाहीन सईद एक उच्च शिक्षित डॉक्टर हैं। वह पहले कानपुर के एक मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग की प्रमुख रह चुकी हैं। 2016 से 2018 तक वह यूएई में भी रहीं, जहां संभवतः उसने जैश नेटवर्क से संपर्क बनाया।
उनके सहयोगियों ने बताया कि शाहीन अक्सर बिना सूचना दिए काम से गायब हो जाती थीं। अब जाँच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने विदेश में किन संस्थाओं से संपर्क किया था और क्या उसने विश्वविद्यालय परिसर का इस्तेमाल कट्टरपंथी भर्ती केंद्र के रूप में किया।
परिवार में दूरी और अलगाव की कहानी
डॉ. शाहीन की शादी डॉक्टर हयात जफर से हुई थी, लेकिन 2012 में दोनों का तलाक हो गया। उनके दो बच्चे अपने पिता के साथ रहते हैं। परिवार ने दावा किया है कि शाहीन कई सालों से उनसे संपर्क में नहीं थी और उन्हें उसकी गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी।
महिला नेटवर्क पर एजेंसियों की नज़र
अब जाँच एजेंसियां जमात-उल-मोमिनात की गतिविधियों और फंडिंग नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान में बैठे जैश के वरिष्ठ नेताओं ने भारत में पढ़ी-लिखी और तकनीकी रूप से सक्षम महिलाओं को भर्ती कर आतंकी नेटवर्क को “सॉफ्ट कवच” देने की योजना बनाई थी।
जैश की यह नई रणनीति भारत में आतंकवाद के बदलते रूप की ओर इशारा करती है — जहाँ डॉक्टर, शिक्षक और प्रोफेशनल महिलाएँ अब ‘जिहादी मशीन’ का हिस्सा बनाई जा रही हैं।