पूनम शर्मा
दक्षिण भारत इस समय कई बड़े विवादों और जांचों के केंद्र में है। कर्नाटक से लेकर केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक प्रशासनिक लापरवाही, धार्मिक विवाद और भ्रष्टाचार के मामलों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सबसे बड़ा मामला बेंगलुरु की परप्पाना अग्राहरा सेंट्रल जेल से जुड़ा है, जहाँ से सामने आए वीडियो ने पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परप्पाना अग्राहरा जेल में “वीआईपी अपराधी”
बेंगलुरु की इस हाई-सिक्योरिटी जेल से लीक हुए वीडियो में आतंकवाद के आरोपित और एक सीरियल किलर सहित कई कैदियों को मोबाइल फोन, लग्ज़री सुविधाओं और विशेष भोजन का आनंद लेते देखा गया। वीडियो में कुछ कैदी अपने सेल में मोबाइल पर बात करते और आरामदायक बिस्तर पर बैठे दिखाई दिए।
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे “जेल के भीतर से आतंकियों के लिए वीआईपी सुविधा” बताते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरामैया और गृह मंत्री जी. परमेश्वर के इस्तीफे की मांग की।
गृह मंत्री परमेश्वर ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए एक उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा—
“कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि जेल प्रशासन या किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
इस मामले ने राज्य सरकार की सुरक्षा नीतियों और जेल प्रणाली की पारदर्शिता पर गहरी चिंता खड़ी की है।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर नमाज़ विवाद
इसी बीच एक और विवाद ने कर्नाटक की राजनीति को हिला दिया। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खुले में नमाज़ पढ़े जाने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
BJP और कुछ हिंदू संगठनों ने कहा कि हवाई अड्डा एक सार्वजनिक स्थल है, जहां धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे “धार्मिक स्वतंत्रता” का मामला बताया और कहा कि “किसी भी धर्म के व्यक्ति को अपनी आस्था व्यक्त करने का अधिकार है, जब तक वह सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा न डाले।”
यह विवाद अब राज्य की राजनीति में धर्म बनाम व्यवस्था के नए बहस का रूप ले चुका है।
केरल में RSS गीत पर राजनीतिक टकराव
दक्षिण भारत में तनाव केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। केरल में भी राजनीतिक विवाद तब भड़क गया जब वंदे भारत एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में RSS से जुड़े एक गीत को गाया गया। वामपंथी सरकार ने इसे “राज्य की धर्मनिरपेक्ष छवि पर आघात” बताया और इस मामले की जांच का आदेश दिया है।
विपक्षी दलों ने सरकार पर “संघ विरोधी मानसिकता” का आरोप लगाया है।
भाजपा के केरल अध्यक्ष ने कहा—
“‘वंदे मातरम’ या कोई भी देशभक्ति गीत गाना अपराध नहीं। सरकार इसे राजनीतिक रंग देकर राष्ट्रभक्ति को अपमानित कर रही है।”
राज्य के परिवहन मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम सरकारी था, इसलिए किसी खास संगठन का गीत गाना उचित नहीं था। यह विवाद अब राज्य विधानसभा तक पहुंच गया है।
तिरुपति देवस्थानम में घी घोटाला
आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में भी एक बड़ा घोटाला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में प्रसाद और पूजा सामग्री के लिए जो घी उपयोग किया जाता है, उसमें मिलावट की जा रही थी।
CBI और राज्य की SIT ने मिलकर इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि करोड़ों रुपये का घी आपूर्ति अनुबंध फर्जी कंपनियों को दिया गया था, जिन्होंने नकली घी सप्लाई कर दिया।
स्थानीय श्रद्धालुओं में इस खबर के बाद गहरा आक्रोश है। TTD के चेयरमैन ने कहा—
“भगवान बालाजी के नाम पर धोखाधड़ी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।”
तमिलनाडु में मतदाता सूची पर घमासान
उधर तमिलनाडु में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ डीएमके सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। बीजेपी और एआईएडीएमके दोनों का कहना है कि “नकली मतदाताओं” के नाम सूची में जोड़े जा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने दावा किया है कि यह “सामान्य विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया” है, जो हर दो साल में की जाती है। लेकिन विपक्ष ने इसके खिलाफ राज्यभर में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
दक्षिण भारत में प्रशासन और राजनीति की परीक्षा
कर्नाटक की जेल लापरवाही, केरल में धार्मिक गीत विवाद, आंध्र के देवस्थानम घोटाले और तमिलनाडु के मतदाता सूची विवाद—ये सभी घटनाएं मिलकर एक बड़ी तस्वीर पेश करती हैं।
यह तस्वीर उस प्रशासनिक ढांचे की है, जो कहीं भ्रष्टाचार, कहीं राजनीतिक पूर्वाग्रह और कहीं धार्मिक असहिष्णुता से जूझ रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में इन घटनाओं का असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
जहां कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकारें “सांप्रदायिक सौहार्द” की बात कर रही हैं, वहीं भाजपा इन विवादों को “राज्य प्रबंधन की असफलता” और “धार्मिक पक्षपात” के रूप में पेश कर रही है।
निष्कर्ष:
परप्पाना अग्राहरा जेल का “वीआईपी स्कैंडल” केवल एक जेल प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि यह एक संकेत है कि दक्षिण भारत में शासन और जवाबदेही की सीमाएं धुंधली हो रही हैं। चाहे वह मंदिर का घी हो या हवाई अड्डे पर नमाज़—हर घटना एक नए राजनीतिक संदेश में बदल रही है। आने वाले महीनों में इन विवादों का असर न केवल राज्य सरकारों बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहराई से दिख सकता है।