प्रधानमंत्री मोदी की मणिपुर यात्रा – एक रचनात्मक विश्लेषण

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उत्तर-पूर्व भारत पिछले ग्यारह वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति और विकास का साक्षी रहा है, चाहे वह बहुआयामी बुनियादी ढाँचे  और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में हो, जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो या सांस्कृतिक, भौतिक और भावनात्मक रूप से देश के अन्य हिस्सों से जोड़ना हो। दक्षिण-पूर्व एशिया का द्वार होने के नाते, यह क्षेत्र Act-East की नीति का अग्रणी बनने का लंबे समय से हकदार था। जब तक विकास देश के प्रत्येक कोने तक नहीं पहुँचता, हम “विकसित भारत” के अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सकते।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने हाल ही में 13-14 सितंबर, 2025 के दौरान उत्तर-पूर्व भारत के तीन राज्यों – मिजोरम, मणिपुर और असम की यात्रा की। तीनों राज्यों के लोगों को इस यात्रा ने एक सकारात्मक ऊर्जा, उत्साह और नई आशा से भर दिया है। हालांकि प्रधानमंत्री अक्सर देश भर में यात्रा करते हैं, लेकिन मणिपुर की उनकी यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है । मणिपुर में 2023 में भड़की विनाशकारी मेइती-कुकी (Meitei-Kuki) जातीय हिंसा के बाद यह उनकी पहली यात्रा थी। ऐसा संघर्ष, जिसने मणिपुर के लोगों की अनगिनत रातों की नींद छीन ली है। एक त्रासदी, जिसने 250 से अधिक जानें ले ली हैं और लगभग 60,000 व्यक्तियों को उनके घरों से जबरन विस्थापित (IDP – Internally Displaced Persons) कर दिया है। एक ऐसी हिंसा जिसमें न जाने कितनी ही मणिपुरी महिलाएँ बलात्कार का शिकार हुई , असंख्य छात्रों की शिक्षा गंभीर रूप से बाधित हुई है। इसके अलावा असंख्य मणिपुरियों की आजीविका पर भी दुष्प्रभाव पड़ा । मणिपुरी जन-मानस के इन पीड़ादायक घावों को एक उपचार , स्नेहभरे स्पर्श की आवश्यकता थी। दो लंबे वर्षों से, मणिपुर के लोग अपने प्रिय प्रधानमंत्री का इंतजार कर रहे थे कि वे उनके पास आएँ , उनके दर्द को सुनें, सांत्वना दें, और उनके आँसू पोंछें ।

प्रधानमंत्री मोदीजी की मणिपुर में पहली सार्वजनिक-सभा, संघर्ष के केंद्र चूड़ाचाँदपुर जिले में थी, जो कुकी-जो (Kuki-Zo) बहुल क्षेत्र है।प्रतिकूल मौसम के कारण, इम्फाल से रैली स्थल तक जाने हेतु प्रधानमंत्री ने सड़क-मार्ग से यात्रा करने का विकल्प चुना। चूड़ाचाँदपुर के पास ग्राउंड पर उन्होंने ₹7,300 करोड़ से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, और एक राहत शिविर में विस्थापितों से मुलाकात की, उनके पीड़ा भरी घटनाओं को उनके द्वारा सुना, और बच्चों के साथ एक मार्मिक क्षण भी साझा किया जिन्होंने अपनी आकांक्षाओं और चुनौतियों की बातें सुनाईं। फिर प्रधानमंत्री इम्फाल पहुँचे , जहाँ हजारों लोग ऐतिहासिक कांगला किले पर उनके सार्वजनिक संबोधन को सुनने के लिए जमा हुए। इम्फाल से उन्होंने लगभग ₹1,200 करोड़ मूल्य की 17 परियोजनाओं का उदघाटन किया । उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार सुलह और विकास के लिए अथक प्रयास कर रही है। उन्होंने विस्थापित परिवारों की पीड़ाओं को सुना, शांति और सामान्य अवस्था बहाल करने के केंद्र की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया, और कहा कि मणिपुर में किसी भी प्रकार की हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है।

रचनात्मक विश्लेषण
मणिपुर म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, अतः अवैध आप्रवासन मणिपुर की सुरक्षा के लिए अंत्यंत संवेदनशील है। पहले, मेइति (मुख्यतः इम्फाल घाटी निवासी, सनमाही-आस्था और वैष्णवधर्म के अनुयायी) और कुकी-जो ( मुख्य रूप से पहाड़ी जनजातियाँ , ईसाई धर्म के अनुयायी) सद्भावपूर्ण एक साथ निवास करते थे, परंतु कुछ विदेशी ताकतें और म्यांमार से कुकी-जो अवैध आप्रवासी, वर्तमान मेइती-कुकी संघर्ष के मूल कारण रहे हैं, जो मणिपुर में पिछले दशक की सबसे बुरी हिंसा के रूप में परिलक्षित हुई है। मणिपुर को वर्षों से ऐसी हिंसा ने प्रभावित किया है और इन समस्याओं को हल करने के लिए मूल कारण को समझना आवश्यक है – मणिपुर के समृद्ध और जटिल सामाजिक-जातीय-राजनीतिक ताने-बाने को समझने की जरूरत है। मणिपुर के साथ सीमा वाले म्यांमार के क्षेत्रों में प्रगति और विकास, चूड़ाचाँदपुर में अवैध आप्रवासन की महत्वपूर्ण समस्या से निपटने की कुंजी रखते हैं।

मुझे मणिपुर के कुछ लोगों से फोन पर बात करने का अवसर मिला, और उन्होंने कहा – “लोग सामान्यत: प्रसन्न हैं कि प्रधानमंत्री उनसे मिलने मणिपुर आए। वे उन विकास योजनाओं से भी खुश हैं जिनकी आधारशिला प्रधानमंत्रीजी ने रखी है। प्रधानमंत्री का विस्थापितों से मिलना, राहत शिविरों का दौरा आदि को राज्य में शांति बनाए रखने की ओर एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। फिर भी लोगों के दिलों और दिमागों में कई सवाल हैं। हालांकि हजारों लोग विस्थापित हैं, सैकड़ों जानें चली गई हैं, लेकिन उनकी पुनर्वास और उत्थान कार्यक्रमों के लिए कोई महत्वपूर्ण विकास का कार्य अभी तक नहीं दिखा है। वास्तव में, कुछ लोग मानते हैं कि दो संबंधित समुदायों (मेइती और कुकी) को अलग-अलग संबोधित करने के बजाय, प्रधानमंत्री को उन्हें एक साथ संबोधित करना चाहिए था ताकि सभी फिर से एकजुट हो सकें – शायद यह दो समुदायों के बीच विश्वास और शांति निर्माण के पहले कदम के रूप में कार्य कर सकता था ! लोग आशा कर रहे थे कि प्रधानमंत्री मणिपुर में उनके साथ अधिक समय बिताते, तब वे उनकी कठोर जमीनी वास्तविकताओं का अनुभव कर सकते थे। लोगों को शांति, न्याय और पुनर्वास के लिए रोडमैप की उम्मीद थी। प्रधानमंत्रीजी ने जातीय हिंसा या सरकार द्वारा समस्या को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएँगे, इसके विषय में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।”

आगामी रोडमैप

मणिपुर की समस्याओं को समझना और हल करना सहज नहीं है। मणिपुर के लोगों को समझना होगा कि प्रधानमंत्री को भी ऐसा करने के लिए समय चाहिए – वे सभी चुनौतियों का तुरंत निवारण नहीं सकते। शांति-उद्यमों के वांछनीय फल आने से पहले थोड़ा धैर्य रखना होगा। म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अवैध आप्रवास की प्रक्रिया को सरकारों द्वारा कुशलतापूर्वक निपटना होगा, कुछ पहल हमारे नागरिकों से भी वांछनीय हैं। जमीनी-स्तर पर प्रगति और विकास, अवैध आप्रवासन की समस्या से निपटा जा सकता है,परंतु सरकारें अकेले सब कुछ नहीं कर सकतीं। मणिपुर के लोगों को विदेशियों द्वारा हमारी भूमि और संसाधनों पर अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठानी होगी। एक राज्य या राष्ट्र को चलाना लोकतांत्रिक समाज में एक भागीदारीपूर्ण प्रक्रिया है। उदाहरण-स्वरूप, नीति-निर्माण और उन्हें लागू करने के आवश्यक उपाय सरकारों द्वारा किए जाते हैं, साथ-साथ नागरिकों का सहयोग, जागरूकता और सतर्कता समान रूप से महत्वपूर्ण है। लोग वैसी ही सरकार का गठन कर पाते हैं जिनके वे योग्य होते हैं, क्योंकि नेता तो नागरिकों के बीच से ही, नागरिकों द्वारा ही द्वारा चुने जाते हैं। हालांकि, कभी-कभी, कोई-कोई प्रणाली जो क्षयकारी गतिविधियों का शिकार होती हैं, उन्हें सुधारने के लिए विशेष सुधार एवं उपाय, उचित देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है। यदि प्रणाली के घटकों में ही रोग को सुधारने की सच्ची मंशा की कमी हो, तो उसका उपचार प्रशासन-तंत्र में ऊपर से ही करना पड़ेगा, संवेदनशीलता से और सख्तीपूर्वक ।

जमीनी-स्तर पर जन-मानस से बात करना, उनकी परिस्थितियों तथा कठिनाइयों को उनके दृष्टिकोण से देखना-समझना किसी भी समस्या को समझने और हल करने के लिए आवश्यक है। मेइती और कुकी-जो समुदायों के साथ आपसी विश्वास-अनुकूल वातावरण में संवेदशीलता-सहित संवाद, तथा अवैध आप्रवासन द्वारा राज्य और राष्ट्र की सुरक्षा, शांति और प्रगति को उत्पन्न खतरे को समझाना, स्थिति में मदद कर सकता है। आईडीपी के पुनर्वास के लिए गंभीर और तत्काल कार्रवाई, छोटे पैमाने के उद्यमियों और किसानों के व्यवसायों को पुनर्निर्माण के लिए सहायता-पैकेज, अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी, स्वायत्त स्थानीय निकायों को मजबूत करना अति-आवश्यक है।

मणिपुरी जन-मानस प्रतिभाशाली, कड़ी मेहनत करने वाले, मजबूत लोग हैं। वे बेहतर जीवन के पात्र हैं, और इसके लिए अधिकारियों को उन तक पहुँचना होगा ताकि विश्वास का पुनर्निर्माण हो और भावुक-मानसिक अंतरालों को पाटा जा सके- मणिपुर को भारत का वास्तविक रत्न बनाने के लिए, जोकि मणिपुर के नाम का अर्थ है। मणिपुरी अपने प्रधानमंत्रीजी के पुनः और बार-बार आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे भी उन्हें दिखा सकें कि वे उनसे कितना प्रेम करते हैं।

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