मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में 24,634 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे मंजूरी

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पूनम शर्मा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ने मंगलवार को मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में चार मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 24,634 करोड़ रुपये है और इससे भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 894 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

रेल परियोजनाओं का इतिहास भारत में ब्रिटिश शासन तक जाता है। 1853 में पहली बार मुंबई से ठाणे तक रेल लाइन खुलने के बाद, भारत ने रेलवे को केवल यात्री परिवहन का साधन ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास का आधार माना। स्वतंत्रता के बाद, विशेषकर 1980 के दशक में, रेल नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हुआ। समय के साथ, रेलवे ने न केवल यात्री सेवा बल्कि माल ढुलाई में भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।

नई मंजूर परियोजनाओं में मध्यप्रदेश में वडोदरा-रतलाम (259 किमी) में तीसरी और चौथी लाइन और इटारसी-भोपाल-बीना (84 किमी) में चौथी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए यात्रियों और माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी। मध्यप्रदेश में इससे लगभग 3,633 गांवों तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिनकी आबादी लगभग 85.84 लाख है, और इसमें विदिशा और राजनंदगांव जैसे दो एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट शामिल हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैश्नव ने बताया कि ये परियोजनाएँ PM-Gati Shakti National Master Plan के तहत बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य केवल रेलवे क्षमता बढ़ाना नहीं बल्कि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। उन्होंने यह भी बताया कि इन परियोजनाओं से पर्यटन क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा। सांची, सैटपुड़ा टाइगर रिज़र्व, भिंबेटका रॉक शेल्टर, हजारा फॉल्स और नवेगांव नेशनल पार्क जैसी जगहों पर आने-जाने की सुविधा बढ़ेगी, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग में मजबूती आएगी।

माल ढुलाई के क्षेत्र में भी इन परियोजनाओं का बड़ा प्रभाव होगा। कोयला, कंटेनर, सीमेंट, फ्लाई ऐश, खाद्य अनाज और स्टील जैसी सामग्रियों की ढुलाई में सुविधा होगी। क्षमता वृद्धि के बाद वार्षिक 78 MTPA (Million Tonnes Per Annum) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजनाएँ महत्वपूर्ण हैं। ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण, तेल आयात में लगभग 28 करोड़ लीटर की बचत होगी और 139 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 6 करोड़ पेड़ों के रोपण के बराबर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश में इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से न केवल यात्री और माल परिवहन में सुधार होगा, बल्कि राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट जैसे विदिशा और राजनंदगांव में रोजगार और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी। नई लाइनों के कारण कृषि, उद्योग और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित होगा।

रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजनाओं के निर्माण और संचालन से तकनीकी और मानव संसाधन का विकास होगा, जिससे भविष्य में और अधिक रेलवे परियोजनाओं को सुचारू ढंग से लागू किया जा सकेगा। ये परियोजनाएँ राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देंगी।

संक्षेप में, केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूर ये मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के लिए आने वाले वर्षों में परिवहन, व्यापार, पर्यटन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। ये परियोजनाएँ न केवल आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देंगी, बल्कि भारत के नए भारत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेंगी।

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