₹24,634 करोड़ से 4 बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट की मंजूरी

महाराष्ट्र, गुजरात, MP, छत्तीसगढ़ में 894 KM नई लाइनें, गति और क्षमता में होगी जबरदस्त वृद्धि

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  • बड़ा निवेश: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के लिए ₹24,634 करोड़ की लागत वाली चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी।
  • 894 किमी का विस्तार: इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 894 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
  • चार राज्यों को लाभ: यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के 18 जिलों को कवर करेंगे, जिनमें दो आकांक्षी जिले भी शामिल हैं।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर, 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में देश के रेल नेटवर्क को मज़बूत करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने देश के चार प्रमुख रेल मार्गों पर क्षमता और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग (तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण) की चार अहम परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि जिन मार्गों को मंजूरी दी गई है, वे देश के सात सबसे व्यस्त रेलवे गलियारों का हिस्सा हैं। इन गलियारों से देश का लगभग 41% मालगाड़ी (कार्गो) और 41% यात्री यातायात गुजरता है। इन लाइनों पर गाड़ियों का भारी दबाव रहता है, जिससे ट्रेनों के संचालन में विलंब होता है और नेटवर्क जाम की समस्या आती है। इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य इन्हीं भीड़भाड़ वाले मार्गों पर अतिरिक्त क्षमता जोड़ना, ट्रेनों की गति को बढ़ाना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है। इन सभी परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चार प्रमुख परियोजनाएँ: कहाँ-कितना काम होगा?

कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई चार परियोजनाएँ, जो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के 18 जिलों को कवर करेंगी, इस प्रकार हैं:

वर्धा – भुसावल तीसरी और चौथी लाइन (महाराष्ट्र):

लंबाई: 314 किलोमीटर

महत्व: यह महत्वपूर्ण खंड मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल गलियारे का एक अभिन्न अंग है, जिस पर यातायात का घनत्व बहुत अधिक है। तीसरी और चौथी लाइन जुड़ने से इस रूट पर यात्रियों और मालगाड़ियों, दोनों की आवाजाही सुगम और तेज़ हो जाएगी।

गोंदिया – डोंगरगढ़ चौथी लाइन (महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़):

लंबाई: 84 किलोमीटर

महत्व: यह खंड मुंबई-हल्दिया रेल मार्ग पर स्थित है। चौथी लाइन के निर्माण से इस क्षेत्र में माल ढुलाई, विशेष रूप से कोयले और अन्य खनिजों के परिवहन में बड़ा सुधार होगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

वडोदरा – रतलाम तीसरी और चौथी लाइन (गुजरात और मध्य प्रदेश):

लंबाई: 259 किलोमीटर

महत्व: यह मार्ग दिल्ली-मुंबई गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण इस व्यस्ततम रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को गति देगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी। यह गुजरात और मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा।

इटारसी – भोपाल – बीना चौथी लाइन (मध्य प्रदेश):

लंबाई: 237 किलोमीटर

महत्व: यह रूट दिल्ली-चेन्नई गलियारे का महत्वपूर्ण जंक्शन है। चौथी लाइन जुड़ने से मध्य भारत से दक्षिण और उत्तर भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे कोयला, कंटेनर, सीमेंट, खाद्यान्न और इस्पात जैसी वस्तुओं के परिवहन में बड़ी मदद मिलेगी।

आर्थिक और सामाजिक लाभ: रोज़गार सृजन और लॉजिस्टिक्स में सुधार

रेल मंत्री ने बताया कि यह मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार किए गए हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 3,633 गांवों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी लगभग 85.84 लाख है। इसमें दो आकांक्षी जिले- विदिशा (मध्य प्रदेश) और राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) भी शामिल हैं, जिन्हें बेहतर रेल सुविधा का लाभ मिलेगा।

इन परियोजनाओं के माध्यम से निर्माण के दौरान लगभग 251 लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होने का अनुमान है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) की लागत कम होगी, जिससे उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि रेल परिवहन अधिक ऊर्जा-कुशल है। अनुमान है कि इन सुधारों से 95 करोड़ लीटर पेट्रोलियम आयात की बचत होगी और CO2 उत्सर्जन में 477 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी, जो लगभग 19 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ देगा।

ये मल्टी-ट्रैकिंग पहलें प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नए भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास और रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसरों के माध्यम से सशक्त बनाएगा।

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