रायपुर में ‘न्यूड पार्टी’ के पोस्टर पर बवाल, 7 लोग गिरफ्तार
सोशल मीडिया पर वायरल हुए आपत्तिजनक पोस्टर के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आए, आयोजक और फार्म हाउस मालिक समेत कई लोग हिरासत में।
- रायपुर में सोशल मीडिया पर ‘न्यूड पार्टी’ का पोस्टर वायरल होने से हंगामा मच गया।
- पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आयोजकों और प्रमोटरों सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया।
- राज्य महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस से 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।
समग्र समाचार सेवा
रायपुर, 15 सितंबर, 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ‘न्यूड पार्टी’ के वायरल पोस्टर ने पूरे शहर में सनसनी मचा दी है। यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्टर तेजी से फैलने लगा, जिसमें 21 सितंबर को एक “स्ट्रेंजर हाउस पूल पार्टी” आयोजित करने का न्योता दिया गया था। पोस्टर में साफ तौर पर लिखा था कि पार्टी में आने वालों को बिना कपड़ों के आना होगा। इसके साथ ही, इसमें रात भर रुकने की सुविधा और 40,000 रुपये की मोटी एंट्री फीस का भी उल्लेख था, जिसने मामले को और भी गंभीर बना दिया।
पोस्टर के वायरल होते ही, इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर इस आयोजन को रोकने की मांग की और पुलिस से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए, रायपुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। क्राइम ब्रांच की टीम ने जांच शुरू की और उन लोगों की पहचान की जो इस आयोजन के पीछे थे। पुलिस ने विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर छापेमारी की योजना बनाई। पुलिस की इस सक्रियता का ही नतीजा रहा कि जिस फार्म हाउस में यह पार्टी आयोजित होने वाली थी, उसके मालिक सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में आयोजक संतोष जेवानी और अजय महापात्रा, फार्म हाउस मालिक संतोष गुप्ता, और सोशल मीडिया प्रमोटर जेम्स बैक, अवनीश गंगवानी, दीपक सिंह, और देवेंद्र कुमार शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन सभी पर एक अज्ञात समूह के साथ मिलकर इस तरह के गैरकानूनी आयोजन की साजिश रचने का संदेह है।
यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि कानून-व्यवस्था की एजेंसियां सोशल मीडिया के दुरुपयोग और इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगी। पुलिस ने बताया कि आयोजक सोशल मीडिया और कुछ प्राइवेट ग्रुप्स के माध्यम से लोगों को इस पार्टी में शामिल होने के लिए लुभा रहे थे।
महिला आयोग हुआ सख्त
इस संवेदनशील मामले में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से 48 घंटे के भीतर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाते, तब तक उन्हें इस मामले की प्रगति रिपोर्ट हर दिन भेजी जाए।
यह कदम इस बात को दर्शाता है कि सरकार और संबंधित संस्थाएं ऐसे आयोजनों को लेकर कितनी गंभीर हैं, जो समाज में अश्लीलता और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं।
कानून और समाज पर असर
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के बदलते मूल्यों और डिजिटल युग की चुनौतियों को भी दर्शाती है। कुछ लोगों द्वारा त्वरित लाभ के लिए ऐसी पार्टियों का आयोजन करना सामाजिक और नैतिक पतन का संकेत है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 292 (अश्लील सामग्री का प्रचार), 293 (युवाओं को अश्लील सामग्री बेचना), और 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील कार्य) के तहत केस दर्ज किया है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि कानून इस तरह के कृत्यों को गंभीरता से लेता है।
इस घटना के बाद, राज्य में राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा है, जबकि भाजपा ने साफ किया है कि इस तरह के आयोजनों को किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जाएगी। यह पूरी घटना समाज में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को ऐसी अनैतिक प्रवृत्तियों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का एक मौका है। यह आवश्यक है कि समाज और सरकार मिलकर ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और तकनीक का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए हो।
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