उत्तरकाशी आपदा: क्या बादल फटा या झील? जानें एक्सपर्ट्स की राय
धराली में अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही, एक्सपर्ट्स के अनुसार क्या हो सकती है इस भयावह आपदा की असली वजह।
- उत्तरकाशी के धराली गांव में अचानक आई बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कई लोग लापता हैं।
- मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान क्षेत्र में बहुत कम बारिश हुई थी, जिससे बादल फटने की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं।
- भूवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपदा ग्लेशियर झील फटने (GLOF) या हिमस्खलन का परिणाम हो सकती है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 अगस्त, 2025 – उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव में एक भयावह प्राकृतिक आपदा ने हड़कंप मचा दिया है। अचानक आए मलबे और पानी के सैलाब ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और कई लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह आपदा बादल फटने की वजह से हुई या इसका कोई और कारण है। इस पर भूवैज्ञानिकों और आपदा विशेषज्ञों की राय अलग है, और वे इसे एक ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की घटना मान रहे हैं।
क्यों खारिज हो रही है ‘बादल फटने’ की थ्योरी?
जब भी उत्तराखंड में इस तरह की कोई बड़ी आपदा होती है, तो उसे अक्सर बादल फटना मान लिया जाता है। हालांकि, इस बार विशेषज्ञ इस थ्योरी को मानने से इनकार कर रहे हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण मौसम विभाग के आंकड़े हैं। धराली क्षेत्र में आपदा के समय और उससे 24 घंटे पहले बहुत कम बारिश दर्ज की गई थी। उदाहरण के लिए, हर्षिल में सिर्फ 6.5 मिमी और भटवाड़ी में 11 मिमी बारिश हुई थी, जो कि ऐसी भयावह बाढ़ लाने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाती। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बादल फटने की घटना होती, तो बारिश का आंकड़ा बहुत ज्यादा होता। कम बारिश के आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि आपदा का कारण कुछ और है।
ग्लेशियर और झील का टूटना बन सकता है वजह
भूवैज्ञानिकों और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, इस त्रासदी की असली वजह एक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) हो सकती है। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में धराली के ठीक ऊपर खीरगंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में कई ग्लेशियर और कम से कम दो झीलें दिखाई देती हैं। भूविज्ञानी डी.डी. चुनियाल के अनुसार, यह संभव है कि इन झीलों में से एक के टूटने से बड़ी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा अचानक नीचे आ गया हो, जिसने यह विनाशकारी रूप ले लिया। यह घटना 2013 की केदारनाथ त्रासदी और 2021 की चमोली आपदा से मिलती-जुलती है, जहां इसी तरह की प्राकृतिक घटनाओं ने भारी तबाही मचाई थी।
तबाही का मंजर और बचाव कार्य
धराली गांव में आई बाढ़ इतनी तेज थी कि किसी को भी बचने का मौका नहीं मिला। चश्मदीदों के अनुसार, पानी और मलबे का सैलाब एक ही पल में सब कुछ बहा ले गया। स्थानीय प्रशासन, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हालांकि, मलबा और खराब मौसम बचाव कार्य में बड़ी बाधा डाल रहे हैं। यह आपदा एक बार फिर से हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने से उत्पन्न हो रहे खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।