पाक हाई कमीशन से जुड़े जासूसी रैकेट का पर्दाफाश: दिल्ली से दो गिरफ्तार,यूपी एटीएस की बड़ी कार्रवाई, भारत की सुरक्षा जानकारी लीक करने का आरोप

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समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली, 22 मई —उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) ने भी  एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली के सीलमपुर निवासी 45 वर्षीय कबाड़ी मोहम्मद हारून और उसके सहयोगी तुफैल को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और अवैध वित्तीय लेनदेन करने के आरोप में दबोचा गया है।

इस गिरफ्तारी से एक बार फिर पाकिस्तान उच्चायोग की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि मोहम्मद हारून सीधे पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत कर्मचारी मुझम्मिल हुसैन के संपर्क में था। यूपी एटीएस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हारून ने भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हुसैन को मुहैया कराईं, जिसके गंभीर नतीजे हो सकते थे।

पैसों के बदले जासूसी और वीजा का सौदा!

जांच में खुलासा हुआ है कि हारून और तुफैल मिलकर पाकिस्तानी नागरिकों को भारत का वीजा दिलवाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलते थे। इसके लिए उन्होंने कई फर्जी बैंक खातों का उपयोग किया, जहां ‘वीजा फीस’ के नाम पर पैसा जमा कराया जाता था। इसके बाद हारून अपना कमीशन काटकर वह रकम मुझम्मिल हुसैन के बताए लोगों या ठिकानों तक पहुंचाता था। एटीएस का कहना है कि इस रकम का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में किया जाता था।

पारिवारिक संबंधों की आड़ में रच रहा था साजिश

मोहम्मद हारून के पाकिस्तान में पारिवारिक संबंध भी सामने आए हैं, जो इस पूरे जासूसी नेटवर्क की गहराई को दर्शाते हैं। वह अक्सर पाक उच्चायोग जाता था और वहीं उसकी मुलाकात मुझम्मिल हुसैन से हुई थी। उसके बाद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। हारून ने जानबूझकर पाकिस्तानी अधिकारी के साथ सांठगांठ की और भारत की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं।

गिरफ्तारी के समय मिले सबूत

गिरफ्तारी के समय एटीएस को हारून के पास से दो मोबाइल फोन और ₹16,900 नकद बरामद हुए हैं। इन फोन में संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, हारून और तुफैल ने कई बार नकद लेन-देन कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया है।

देशद्रोह का नया चेहरा

यह मामला दिखाता है कि किस तरह आम नागरिक की आड़ में दुश्मन देश भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। कबाड़ी जैसे व्यवसाय की आड़ में हारून ने वर्षों तक जासूसी का जाल फैलाया और भारत की आंतरिक सुरक्षा को जोखिम में डाला।

एटीएस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुट गई है और माना जा रहा है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पाकिस्तान उच्चायोग किस तरह भारतीय जमीन पर गुप्तचरों को तैयार करने में संलिप्त है।

यह देशद्रोह है, कबाड़ी की आड़ में देश की अस्मिता को बेचने का अपराध। अब देखना है कि अदालत इस ‘छुपे हुए दुश्मन’ को कितनी सज़ा देती है।

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