समग्र समाचार सेवा
पटना, 28 जून। बिहार बीजेपी में ‘बाबा’ नाम से मशहूर अश्विनी चौबे ने अकेले ही मोर्चा खोल दिया है। आलम ये है कि प्रदेश बीजेपी का कोई बड़ा नेता कुछ भी बोलने से बच रहा है। उन्होंने सीधे-सीधे बिहार बीजेपी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को निशाने पर रखा है। बिहार बीजेपी यूनिट में पर्दे के पीछे से फैसले लेने वाले प्रभारी और संघ से जुड़े नेताओं के लिए भी धर्म संकट पैदा हो गया है। उनको समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अश्विनी चौबे एकदम से एंग्री मैन के रोल में क्यों आ गए? जबकि, उनको पता है कि केंद्र सरकार की स्थिरता के लिए नीतीश कुमार की जरूरत है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अश्विनी चौबे का पीठ कौन ठोक रहा है?
2025 में अपने दम पर चुनाव लड़ने की नसीहत
अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि उनकी पार्टी को अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करने के साथ राज्य में अगली सरकार का नेतृत्व करना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे अपने गृह नगर भागलपुर से ताबड़तोड़ सियासी बैटिंग कर रहे हैं। भाजपा ने हाल के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था। हालांकि इसके साथ अश्विनी चौबे ने कहा कि ये मेरा निजी विचार है, जिसे मैंने पार्टी नेतृत्व को भी बता दिया है। भाजपा को बिहार में नई सरकार का नेतृत्व करना चाहिए। उसे राजग सहयोगियों को साथ लेकर अकेले ही बहुमत प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आलोचक माने जाने वाले अश्विनी चौबे से ये पूछे जाने पर कि ऐसी स्थिति में वो जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष (नीतीश कुमार) की क्या भूमिका देखते हैं, उन्होंने कहा कि नीतीश जी पहले भी हमारे साथ थे, अभी भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत नहीं हासिल कर पाई है और वो जदयू और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से केंद्र में सरकार बना पाई है।
दलबदलुओं को सिरमौर्य बनाने से अश्विनी चौबे नाराज
जब अश्विनी चौबे से पूछा गया कि वो किसे संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में देखते हैं, तब उन्होंने कहा कि इसका फैसला शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया जाएगा। फिलहाल कार्यकर्ताओं को चुनावों में पार्टी को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करने के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए। मैं अपना काम करूंगा, बदले में कुछ भी उम्मीद नहीं करूंगा।
भाजपा में दूसरे दलों से शामिल हुए नेताओं को शीर्ष पद दिए जाने से दुखी जान पड़ रहे अश्विनी चौबे से जब ये पूछा गया कि क्या उनका इशारा प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर है, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब देने से परहेज करते हुए कहा कि मेरा मतलब केवल ये है कि पार्टी का ढांचा दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों के प्रयासों से बना है। हमें उन लोगों को जिला या राज्य स्तर पर इकाई का प्रमुख नहीं बनने देना चाहिए, जिन्होंने संगठन में अपनी पकड़ नहीं बनाई है।
अश्विनी चौबे के पास खोने के लिए कुछ बचा नहीं है
वर्ष 2017 में भाजपा में शामिल हुए सम्राट चौधरी को पिछले साल पार्टी की प्रदेश इकाई का प्रमुख बनाया गया था। इस बीच, भाजपा सूत्रों ने कहा कि बक्सर लोकसभा सीट से हैट्रिक बनाने का मौका से वंचित रह गए अश्विनी चौबे अपने बेटे अरजीत शाश्वत के लिए टिकट चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने 2015 के विधानसभा चुनाव में असफल शुरुआत की थी, लेकिन पांच साल बाद उन्हें एक और मौका नहीं दिया गया।
दरअसल, बिहार बीजेपी के फायरब्रांड नेता अश्विनी चौबे के पास खोने के लिए कुछ बचा नहीं है। बताया जा रहा है कि बीजेपी लीडरशिप की ओर से राज्यपाल बनने के ऑफर को उन्होंने ठुकरा दिया। बक्सर लोकसभा सीट से टिकट पहले ही कट चुका है। पार्टी में किसी सीनियर पोस्ट पर नहीं हैं। लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में अश्विनी चौबे की रहने की वजह से बिहार बीजेपी के नेतृत्व में बहुत कुछ बदल चुका है। बेटे अरजीत के लिए भागलपुर विधानसभा सीट से टिकट की चाहते हैं। लिहाजा, चुप्पी साधने के लिए कहीं से ठोस गारंटी की उम्मीद हो सकती है।
साभार- navbharattimes