पूनम शर्मा
भारत से पढ़े नेताओं की मजबूत मौजूदगी
नेपाल की नई सरकार में भारत से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू सामने आया है. नए प्रधानमंत्री बालेन शाह समेत उनकी 15 सदस्यीय कैबिनेट के लगभग एक-तिहाई मंत्रियों ने भारत में पढ़ाई की है। इससे एक बार फिर यह साफ हुआ है कि नेपाल और भारत के बीच शिक्षा का रिश्ता सिर्फ पुराना ही नहीं, बल्कि आज भी बेहद मजबूत है।
बालेन शाह: इंजीनियर से प्रधानमंत्री तक का सफर
35 वर्षीय बालेन शाह, जो कभी काठमांडू के मेयर रहे और बाद में राजनीति में तेजी से उभरे, पिछले शुक्रवार को नेपाल के नए प्रधानमंत्री बने. उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), ने हालिया चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए संसद की 275 में से 182 सीटें जीत लीं।
बालेन शाह की पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं है। वे एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर और युवा चेहरे के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने 2016 से 2018 के बीच बेंगलुरु स्थित निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक किया था।
कैबिनेट में दिखा भारत में पढ़े मंत्रियों का प्रभाव
बालेन शाह के साथ उनकी कैबिनेट में शामिल कई और चेहरे भी भारत से पढ़ाई कर चुके हैं. नेपाल के भौतिक अवसंरचना, परिवहन और शहरी विकास मंत्री सुनील लामसाल भी निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र रहे हैं। उन्होंने भी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की पढ़ाई की थी। लामसाल पहले काठमांडू नगर निगम में बालेन शाह के साथ काम कर चुके हैं और अब नेपाल के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभालेंगे।
स्वास्थ्य और प्रशासन मंत्रालय में भी भारत कनेक्शन
नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कॉलेज ऑफ नर्सिंग से 2006 से 2010 के बीच पढ़ाई की. बाद में उन्होंने ग्वालियर यूनिवर्सिटी से भी शिक्षा हासिल की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने नेपाल के बिराटनगर स्थित बिराट टीचिंग हॉस्पिटल में काम किया था।
नेपाल की संघीय मामलों, सामान्य प्रशासन, सहकारिता और गरीबी उन्मूलन मंत्री प्रतिभा रावल भी भारत से पढ़ी हुई हैं। वह चेन्नई स्थित एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म की 2014-15 बैच की छात्रा रही हैं। राजनीति में आने से पहले प्रतिभा रावल पत्रकारिता में सक्रिय थीं और कई प्रमुख मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
नेपाल की नई कैबिनेट में महिलाओं की भी मजबूत भागीदारी दिखाई दे रही है. पांच महिला मंत्रियों को जगह दी गई है। इनमें कानून, न्याय और संसदीय मामलों की मंत्री सोबिता गौतम, महिला और बाल विकास मंत्री सीता बाड़ी और कृषि, पशुपालन, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी शामिल हैं।
नेपाल की सबसे युवा सरकारों में एक
बालेन शाह की सरकार को नेपाल की सबसे युवा सरकारों में से एक माना जा रहा है. कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ सदस्य स्वर्णिम वाग्ले की उम्र 51 साल है, जबकि ज्यादातर मंत्री 30 से 40 वर्ष के बीच के हैं।
विरोध प्रदर्शनों से सत्ता परिवर्तन तक
नेपाल में पिछले साल के राजनीतिक घटनाक्रम ने भी इस बदलाव की जमीन तैयार की. तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। सोशल मीडिया पर अस्थायी प्रतिबंध से शुरू हुआ विरोध बाद में भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। इसी माहौल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने खुद को एक नए विकल्प के रूप में पेश किया और जनता का समर्थन हासिल किया।
भारत-नेपाल शिक्षा संबंधों की पुरानी विरासत
नेपाल के कई बड़े नेताओं का भारत से पुराना शैक्षिक रिश्ता रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर और दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में पढ़ाई की थी। बाद में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी की। वहीं नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश और पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर्स किया था।
हालांकि हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने नेपाली छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया है, लेकिन भारत अब भी नेपाल के छात्रों के लिए एक बड़ा और भरोसेमंद शिक्षा केंद्र बना हुआ है। नई नेपाली सरकार में भारत में पढ़े नेताओं की मौजूदगी इस रिश्ते को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।