पूनम शर्मा
छत्तीसगढ़ में 19 मार्च 2026 को विधानसभा ने “धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026” (Freedom of Religion Bill) को पारित कर दिया। यह कानून राज्य में धार्मिक परिवर्तन (कन्वर्ज़न) को लेकर लंबे समय से चल रही बहस और तनाव के बीच लाया गया है। खास बात यह रही कि इस बिल को आवाज़ मत (voice vote) से पारित किया गया, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग करते हुए वॉकआउट किया।
क्या कहता है नया कानून?
इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य जबरन, प्रलोभन, धोखे या दबाव के जरिए किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। इसके तहत निम्न प्रावधान शामिल हैं:
जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन अपराध
यदि कोई व्यक्ति किसी को नौकरी, पैसा, शादी, इलाज या शिक्षा का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो यह दंडनीय होगा।
डिजिटल माध्यम भी शामिल
अब सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश भी अपराध मानी जाएगी।
नॉन-बेलेबल अपराध
पहले के कानून के मुकाबले, अब ऐसे मामलों को गैर-जमानती (non-bailable) और संज्ञेय (cognisable) बना दिया गया है।
पूर्व सूचना अनिवार्य
जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सूचना देनी होगी। यह सूचना पंचायत स्तर तक सार्वजनिक की जाएगी।
आपत्ति का अधिकार
सूचना के बाद 60 दिनों तक कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि 90 दिनों में प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो आवेदन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
‘घर वापसी’ को मिली छूट
इस कानून में “घर वापसी” यानी व्यक्ति का अपने मूल धर्म में लौटना धर्म परिवर्तन की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसका मतलब है कि इस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
संगठनों के लिए नई जिम्मेदारी
जो संस्थाएं धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियां करती हैं, उन्हें हर साल रिपोर्ट देनी होगी जिसमें यह बताना होगा कि कितने लोगों का धर्म परिवर्तन हुआ और इसके लिए धन कहां से आया।
पुराने कानून से कितना अलग?
डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में 2006 में भी ऐसा कानून लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। उससे पहले 1968 में भी एक कानून मौजूद था, लेकिन वह अपेक्षाकृत कम कठोर था।
नया कानून इन मामलों में अधिक सख्त है:
अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है
विशेष अदालतों में सुनवाई का प्रावधान
जांच अधिकारी की न्यूनतम रैंक तय
विवाद और आलोचना
इस कानून को लेकर विरोध भी तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून:
धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है -भारत के संविधान के तहत हर नागरिक को धर्म अपनाने और प्रचार करने का अधिकार है।
दुरुपयोग की आशंका-कई लोगों का मानना है कि इस कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए किया जा सकता है।
बस्तर क्षेत्र में बढ़ा तनाव-बस्तर और आदिवासी इलाकों में पहले से ही धर्म परिवर्तन को लेकर कई बार हिंसा और टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। यह कानून ऐसे क्षेत्रों में और बहस को जन्म दे सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का नया एंटी-कन्वर्ज़न कानून सख्त प्रावधानों के साथ आया है, जिसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन को रोकना है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बना पाएगा या नहीं। आने वाले समय में इसका प्रभाव और विवाद दोनों देखने को मिलेंगे।