2030 तक बाल विवाह खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बनी रणनीति
कांस्टीट्यूशन क्लब में अहम बैठक, सभी दलों की भागीदा
- 2030 तक बाल विवाह खत्म करने के लिए 20+ सांसदों का साझा संकल्प
- संसद और संसदीय क्षेत्रों में मुद्दा उठाने की रणनीति तैयार
- सख्त कानून, विशेष अदालत और डिजिटल पोर्टल का प्रस्ताव
- देशभर में 500+ ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ से जागरूकता अभियान
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 19 मार्च : देश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से अधिक सांसद एक मंच पर एकजुट हुए। राष्ट्रीय राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ के बैनर तले आयोजित इस महत्वपूर्ण संवाद में बाल संरक्षण से जुड़े गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।
सांसदों ने बाल विवाह और सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को बच्चों के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान यह भी तय किया गया कि इन मुद्दों को संसद में शून्यकाल के माध्यम से उठाया जाएगा और निजी विधेयकों के जरिए ठोस कानूनी प्रावधान किए जाएंगे।
‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ पहल को व्यापक समर्थन
इस पहल की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी, जिसे अब तक 38 सांसदों का समर्थन मिल चुका है। इस अभियान को ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का सहयोग प्राप्त है, जो 250 से अधिक संगठनों का देश का सबसे बड़ा बाल अधिकार नेटवर्क है और 450 से ज्यादा जिलों में सक्रिय है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जिसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
सख्त कानून और डिजिटल निगरानी पर जोर
तेलुगु देशम पार्टी के नेता और इस मंच के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि बाल विवाह किसी एक दल या धर्म का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक भी पेश किया है, जिसमें सख्त सजा, विशेष अधिकारी, विशेष अदालतें और डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल जैसे प्रावधान शामिल हैं। साथ ही, बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध लागू करने की मांग भी उठाई गई।
जागरूकता अभियान ने पकड़ी रफ्तार
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान भी चलाया गया, जो देश के 28 राज्यों और 439 जिलों तक पहुंचा। इस अभियान के तहत 500 से अधिक रथ निकाले गए, जिनके माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया गया।
इस पहल में 100 से अधिक सांसदों के साथ-साथ कई मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
राष्ट्रीय प्राथमिकता बना बाल संरक्षण
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ के संस्थापक भुवन ऋभु ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि बाल संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार को ‘बाल विवाह मुक्त भारत दिवस’ घोषित करना चाहिए, जिससे इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और जवाबदेही दोनों बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामाजिक जागरूकता और कानूनी सख्ती एक साथ आएं, तो भारत 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लक्ष्य को हासिल कर सकता है।