संघ विस्तार राष्ट्रीय विचार का विस्तार: होसबाले

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समग्र समाचार सेवा
समालखा हरियाणा 18 मार्च : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक समालखा में सम्पन्न हुई, जिसमें संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित में समाज की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का विस्तार केवल संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विचार का विस्तार है।

उन्होंने बताया कि बीते वर्ष में संघ के कार्यों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। देशभर में शाखाओं की संख्या बढ़कर 88 हजार से अधिक हो गई है, जबकि स्थानों की संख्या 55 हजार के पार पहुंच चुकी है। इसके अलावा साप्ताहिक मिलन और मंडलियों में भी वृद्धि हुई है, जो समाज में संघ की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ का कार्य अब दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और जनजातीय क्षेत्रों में भी शाखाएं सक्रिय हैं। अंडमान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी और अरुणाचल प्रदेश में 21 सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति इसका प्रमाण है।

उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारतीयता केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है। समाज की सज्जन शक्ति को एकत्र कर “पावर ऑफ गुड” को राष्ट्रहित में सक्रिय करना समय की मांग है।

महापुरुषों के योगदान पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को जाति और पंथ के भेद से ऊपर उठकर उनके कार्यों को स्वीकार करना चाहिए। इसी दिशा में संघ द्वारा गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।

संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर उन्होंने बताया कि संघ विकेंद्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्ताव है कि वर्तमान 46 प्रांतों की जगह 80 से अधिक संभाग बनाए जाएं, जिससे कार्य में गति और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

इसके साथ ही उन्होंने समाज में जातिगत विभाजन को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया और मीडिया से भी अपील की कि चुनावों में जाति आधारित विश्लेषण को बढ़ावा न दिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ की स्थापना किसी के विरोध के लिए नहीं, बल्कि समाज को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से हुई है।

बैठक में गौसेवा, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्वावलंबन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। नागरिकों को घरों में सब्जी उत्पादन, जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की योजना भी सामने रखी गई।

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