पश्चिम बंगाल चुनाव की घोषणाओं पर राजनीतिक समीकरण

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
पूनम शर्मा
बंगाल का चुनावी रण: नंदीग्राम से भवानीपुर तक वर्चस्व की जंग

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी बिसात बिछा दी है। इस बार के समीकरण पिछली बार की तुलना में काफी अलग और दिलचस्प नजर आ रहे हैं, जहाँ पुरानी प्रतिद्वंद्विता और नए चेहरों के बीच सत्ता का संघर्ष देखने को मिलेगा।

नंदीग्राम में बदली रणनीति

सबसे चौंकाने वाला फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से आया है। इस बार ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में उन्हें इसी सीट पर सुवेंदु अधिकारी से कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इस बार तृणमूल ने नंदीग्राम से पवित्र कार को मैदान में उतारा है। पवित्र कार कभी सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाते थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने पाला बदलकर ममता बनर्जी का दामन थाम लिया है।

सुवेंदु अधिकारी का दोहरा मोर्चा

वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने अपनी पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी पर बड़ा दांव खेलते हुए उन्हें दो सीटों— नंदीग्राम और भवानीपुर—से मैदान में उतारा है।

नंदीग्राम: यह सुवेंदु का घरेलू मैदान है, जहाँ उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।

भवानीपुर: यहाँ से चुनाव लड़ना ममता बनर्जी के लिए सीधा चैलेंज है, क्योंकि भवानीपुर दक्षिण कोलकाता का वह इलाका है जहाँ ममता दशकों से राज करती आई हैं।

सुवेंदु को दो सीटों से लड़ाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भाजपा नेतृत्व उन पर अटूट भरोसा कर रहा है। भले ही भाजपा ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया है, लेकिन यह कदम सुवेंदु को बंगाल अभियान के अगुआ के रूप में स्थापित करता है।

चुनाव आयोग पर ममता का तीखा हमला

उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (EC) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आचार संहिता लागू होते ही राज्य के शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों पर सवाल उठाए। ममता ने आरोप लगाया कि:

अधिकारियों की नियुक्ति भाजपा के इशारे पर की जा रही है।

नए अधिकारियों का चयन इसलिए किया गया है ताकि भाजपा चुनाव के दौरान नकदी और हथियारों की आवाजाही कर सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनौती देते हुए उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि उन्हें भाजपा के प्रचार में ही शामिल हो जाना चाहिए।

‘मां, माटी, मानुष’ का युद्ध घोष

ममता बनर्जी ने इस बार 226 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, जो 2021 के आंकड़े (215) से 11 अधिक है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह “बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई” है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दिल्ली का लड्डू यहाँ नहीं चलेगा, बंगाल की जीत यहाँ के लोगों (मानुष) से होगी।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.