समालखा में संघ की प्रतिनिधि सभा संपन्न, विस्तार और सामाजिक समरसता पर जोर

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समग्र समाचार सेवा
समालखा (पानीपत) 17 मार्च : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति को सक्रिय करने के संकल्प के साथ संपन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से संवाद करते हुए संगठन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ का विस्तार केवल संगठनात्मक वृद्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विचार के विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में संघ की शाखाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शाखाओं की संख्या छह हजार से अधिक बढ़कर 88 हजार के पार पहुंच गई है, जबकि कार्यस्थलों की संख्या भी 55 हजार से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडलियों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि संघ का कार्य अब दूरदराज और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और जनजातीय इलाकों में भी शाखाएं संचालित हो रही हैं। अंडमान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी रही, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

सरकार्यवाह ने कहा कि संगठन विस्तार के साथ गुणवत्ता संवर्धन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की बात कही। उनके अनुसार भारतीयता या हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है, जो समाज को एकजुट और सशक्त बनाती है।

महापुरुषों के योगदान पर बात करते हुए होसबाले ने कहा कि समाज को जाति और पंथ के भेद से ऊपर उठकर उनके विचारों को अपनाना चाहिए। इसी क्रम में गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी रही। इसके अलावा वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई।

आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अगले वर्ष 96 प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। साथ ही गौसेवा और ग्राम विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। लोगों को घरों में सब्जी उद्यान बनाने, देसी खाद के उपयोग और जल संरक्षण जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

संघ की संगठनात्मक संरचना में बदलाव के संकेत देते हुए होसबाले ने कहा कि विकेंद्रीकरण पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान 46 प्रांतों के स्थान पर 80 से अधिक संभाग बनाए जा सकते हैं, जिससे कार्य अधिक प्रभावी और सुगम हो सके।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना किसी के विरोध के लिए नहीं हुई थी। केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में जातिगत विभाजन समाप्त करने में मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

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