पूनम शर्मा
केरल की राजनीति, जो दशकों से यूडीएफ (UDF) और एलडीएफ (LDF) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी 47 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर यह साफ कर दिया है कि वह इस बार केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता की मुख्य लड़ाई में शामिल होने के लिए उतरी है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर का है, जिन्हें तिरुवनंतपुरम की प्रतिष्ठित नेमोम (Nemom) सीट से मैदान में उतारा गया है।
नेमोम का दांव: प्रतिष्ठा की लड़ाई
नेमोम सीट भाजपा के लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि केरल में उसके प्रवेश का ‘गेटवे’ रही है। 2016 में ओ. राजगोपाल ने इसी सीट से जीत दर्ज कर भाजपा का खाता खोला था। पिछले चुनाव में यह सीट हाथ से निकल गई थी, लेकिन राजीव चंद्रशेखर जैसे कद्दावर और आधुनिक छवि वाले नेता को यहाँ से उतारकर भाजपा ने संदेश दिया है कि वह अपनी सबसे मजबूत जमीन को वापस पाने के लिए तैयार है। चंद्रशेखर की छवि एक विकासोन्मुख और तकनीकी रूप से दक्ष नेता की है, जो युवाओं और शहरी मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं।
रणनीति: अनुभव और नए चेहरों का संगम
47 उम्मीदवारों की इस पहली सूची का बारीकी से अध्ययन करें, तो भाजपा की रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ नजर आते हैं:
दिग्गजों पर भरोसा: भाजपा ने उन क्षेत्रों में अपने सबसे अनुभवी चेहरों को उतारा है जहाँ जीत की संभावना सबसे अधिक है। केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि केरल अब उनके लिए ‘अछूता’ नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा राज्य है जहाँ मेहनत से नतीजे बदले जा सकते हैं।
जातीय और धार्मिक संतुलन: केरल का सामाजिक ढांचा बहुत जटिल है। भाजपा ने इस बार हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के साथ-साथ ईसाई समुदाय के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की है। टिकटों के बंटवारे में विभिन्न समुदायों का ध्यान रखा गया है ताकि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को धरातल पर उतारा जा सके।
युवा और महिला भागीदारी: सूची में नए और ऊर्जावान चेहरों को स्थान देकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि वह राज्य के परंपरागत नेतृत्व के खिलाफ एक विकल्प पेश कर रही है।
क्या बदलेगा केरल का सियासी मिजाज?
केरल में इस समय सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एलडीएफ सरकार बैकफुट पर दिख रही है। वहीं, कांग्रेस नीत यूडीएफ अपनी जमीन बचाने की जद्दोजहद में है। ऐसे में भाजपा खुद को ‘तीसरे और सशक्त विकल्प’ के रूप में पेश कर रही है। राजीव चंद्रशेखर का नेमोम से लड़ना न केवल उस सीट को प्रभावित करेगा, बल्कि आसपास की कम से कम 10 सीटों पर भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाएगा।
भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती वोट शेयर को सीटों में बदलना है। पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत तो बढ़ा है, लेकिन वह सीटों की संख्या में तब्दील नहीं हो पाया। इस बार ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की तैनाती यह संकेत दे रही है कि पार्टी ने अपनी पुरानी गलतियों से सीखा है।
चुनौतियां अभी कम नहीं हैं
भले ही भाजपा ने पहली सूची जारी कर मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की कोशिश की है, लेकिन केरल की राह कांटों भरी है। राज्य की साक्षरता और जागरूक मतदाता किसी भी लहर में आसानी से नहीं बहते। साथ ही, एलडीएफ और यूडीएफ का मजबूत कैडर ढांचा भाजपा के लिए बड़ी बाधा है। भाजपा को ‘सांप्रदायिक’ छवि के ठप्पे से बाहर निकलकर विकास और सुशासन के मुद्दे पर जनता को जोड़ना होगा।
निष्कर्ष
केरल विधानसभा चुनाव 2026 की यह पहली सूची भाजपा के ‘दक्षिण विजय’ अभियान का एक अहम हिस्सा है। राजीव चंद्रशेखर का नाम इस लड़ाई को और भी दिलचस्प बना देता है। यदि भाजपा नेमोम जैसी सीटों पर जीत दर्ज करती है और अपने वोट शेयर को 20% के पार ले जाने में सफल रहती है, तो यह केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी। आने वाले दिनों में जब बाकी सीटों पर भी नाम साफ होंगे, तब यह देखना रोचक होगा कि भाजपा अपने इस उत्साह को जीत में बदल पाती है या नहीं।
फिलहाल, केरल की चुनावी बिसात बिछ चुकी है और भाजपा ने अपनी पहली चाल चलकर विरोधियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।