लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी सेना का AMAR कॉम्बैट कोर्स करने वाली पहली महिला

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

समग्र समाचार सेवा 
पुणे महाराष्ट्र 12 मार्च: भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी ने आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (AMAR) कॉम्बैट कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है। वह इस कठिन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।

यह प्रतिष्ठित कोर्स पुणे स्थित आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल ट्रेनिंग में आयोजित किया जाता है और इसे सेना के सबसे कठिन कॉम्बैट प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। इस उपलब्धि ने न केवल दीक्षा त्रिपाठी की व्यक्तिगत क्षमता और दृढ़ संकल्प को उजागर किया है, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता को भी रेखांकित किया है।

शारीरिक और मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा

AMAR कोर्स को बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यह प्रशिक्षण सैनिकों की शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक मजबूती और युद्ध कौशल की सीमाओं की कड़ी परीक्षा लेता है।
सेना के अनुसार, लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी ने इस कोर्स की कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए असाधारण धैर्य, साहस और दृढ़ता का प्रदर्शन किया। उन्होंने न केवल कोर्स को पूरा किया बल्कि अपने प्रदर्शन से उत्कृष्टता भी हासिल की।
यह प्रशिक्षण विशेष रूप से क्लोज-क्वार्टर बैटल (निकट दूरी की लड़ाई) के लिए तैयार किया गया है, जहां सैनिकों को कई बार बिना आग्नेयास्त्रों के भी दुश्मन का सामना करना पड़ सकता है।

2023 में शुरू हुआ आधुनिक कॉम्बैट सिस्टम

AMAR प्रणाली को भारतीय सेना ने 2023 में शुरू किया था। यह एक आधुनिक और संरचित कॉम्बैट प्रशिक्षण प्रणाली है, जिसे सैनिकों की युद्ध क्षमता को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
इसमें पारंपरिक भारतीय मार्शल आर्ट्स के साथ अंतरराष्ट्रीय तकनीकों का संयोजन किया गया है। प्रशिक्षण में निहत्थे युद्ध, हथियारों का उपयोग, सहनशक्ति बढ़ाने के अभ्यास और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इसके अलावा इस कोर्स में सैनिकों को तेज धार वाले हथियारों, अस्थायी हथियारों और अचानक होने वाले हमलों से बचाव और जवाबी कार्रवाई की तकनीक भी सिखाई जाती है।

ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध के लिए विशेष प्रशिक्षण

AMAR प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सैनिकों को ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में युद्ध के लिए तैयार करना भी है।
भारतीय सेना की बड़ी संख्या में तैनाती ऐसे इलाकों में होती है जहां मौसम बेहद कठोर और परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऐसे वातावरण में सैनिकों की शारीरिक क्षमता और मानसिक संतुलन दोनों की परीक्षा होती है।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से लड़ने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया जाता है।

सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। महिलाएं अब पैराशूट जंपिंग, लंबी दूरी की दौड़, समुद्री अभियानों और सैन्य रैलियों जैसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं।
हाल के वर्षों में महिलाओं ने कई ऐसे क्षेत्रों में भी प्रवेश किया है जिन्हें पहले केवल पुरुष सैनिकों का क्षेत्र माना जाता था।
लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी की यह उपलब्धि इसी बदलते दौर का प्रतीक है। उनकी सफलता आने वाली महिला अधिकारियों के लिए प्रेरणा बनेगी और भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करेगी।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.