11 मार्च दैनिक राशिफल एवं आज का पंचांग

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🐏मेष
मित्रों तथा संबंधियों की सहायता करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। अपेक्षित कार्य समय पर पूरे होंगे। विवाद से बचें। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। मेहनत का फल मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। प्रमाद न करें।

🐂वृष
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। किसी नजदीकी व्यक्ति से संबंध बिगड़ सकते हैं। पुराना रोग उभर सकता है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय होगी। धैर्य रखें। नौकरी में तनाव रहेगा। अपेक्षित कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाएंगे।

👫मिथुन
स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। कोई बड़ा सौदा बड़ा लाभ दे सकता है। प्रमाद न कर भरपूर प्रयास करें। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। धनलाभ सहज होगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। चिंता बनी रहेगी।

🦀कर्क
कानूनी बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। नए काम मिल सकते हैं। नौकरी में अधीनस्थ कर्मचारी सहयोग करेंगे। घर-बाहर प्रसन्नता तथा उत्साह बने रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में उपहार आदि देना पड़ सकते हैं। जल्दबाजी न करें।

🐅सिंह
राजकीय सहयोग से कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा। नौकरी में चैन रहेगा। सहकर्मी साथ देंगे। किसी धार्मिक यात्रा का आयोजन हो सकता है। अध्यात्म में रुचि रहेगी। प्रसन्नता तथा उत्साह में वृद्धि होगी। आलस्य न करें।

🙍‍♀️कन्या
नई योजना बनेगी। तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। कार्यस्थल पर सुधार या परिवर्तन संभव है। लंबित कार्य पूर्ण होने के योग हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कारोबार में अनुकूलता रहेगी। निवेश शुभ फल देगा। शत्रुओं से सावधान रहें।

⚖️तुला
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। मित्रों तथा परिवार के सदस्यों के साथ समय सुखमय व्यतीत होगा। शोध इत्यादि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। संगीत इत्यादि रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। जोखिम न उठाएं। वाणी में संयम आवश्यक है।

🦂वृश्चिक
काम में मन नहीं लगेगा। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। कीमती वस्तुएं गुम हो सकती हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवेक से कार्य करें। लाभ होगा। चोट व दुर्घटना से शारीरिक हानि संभव है। स्वास्थ्‍य का पाया कमजोर रहेगा।

🏹धनु
यात्रा लाभदायक रहेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। आय में वृद्धि होगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। घर-परिवार की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा।

🐊मकर
यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ रहेगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से मनोनुकूल लाभ होगा। पुराना रोग उभर सकता है।

🍯कुंभ
नजदीकी वातावरण सुखद रहेगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। दूसरे अधिक अपेक्षा करेंगे। दुष्टजनों से सावधान रहें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। निवेश में सोच-समझकर हाथ डालें।

🐟मीन
पुराना रोग परेशानी तथा बाधा का कारण बन सकता है। लापरवाही न करें। फालतू खर्च होगा। आर्थिक परेशानी रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नौकरी में समस्याएं रहेंगी। यात्रा यथासंभव टालें। जोखिम नहीं लें। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। आय बनी रहेगी।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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आचार्य ज्योतिष सचिन पांडे

दिनाँक:-11/03/2026,बुधवार
अष्टमी, कृष्ण पक्ष,
चैत्र
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– अष्टमी 28:18:59 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र———— ज्येष्ठा 21:59:24
योग————– वज्र 09:11:08
करण———- बालव 15:07:32
करण———- कौलव 28:18:59
वार———————— बुधवार
माह————————– चैत्र
चन्द्र राशि—- वृश्चिक 21:59:24
चन्द्र राशि——————- धनु
सूर्य राशि—————— कुम्भ
रितु————————– वसंत
आयन——————- उत्तरायण
संवत्सर———–‐—— विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर)————- सिद्धार्थी
विक्रम संवत—————- 2082
गुजराती संवत————– 2082
शक संवत—————— 1947
कलि संवत—————- 5126

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:34:35
सूर्यास्त—————- 18:24:11
दिन काल————- 11:49:35
रात्री काल————- 12:09:19
चंद्रास्त—————- 11:08:12
चंद्रोदय————— 25:49:18

लग्न—- कुम्भ 26°14′ , 326°14′

सूर्य नक्षत्र———— पूर्वाभाद्रपदा
चन्द्र नक्षत्र—————— ज्येष्ठा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

या—- ज्येष्ठा 08:32:30

यी—- ज्येष्ठा 15:16:13

यू—- ज्येष्ठा 21:59:24

ये—- मूल 28:41:51

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= कुम्भ 26°10 , पूoफाo 2 सो
चन्द्र= वृश्चिक 22°30 , ज्येष्ठा 2 या
बुध = कुम्भ 19°52 ‘ शतभिषा 4 सू
शु क्र= मीन 11°05, उo भाo 3 झ
मंगल= कुम्भ 12°03शतभिषा 2 सा
गुरु= मिथुन 20°33 पुनर्वसु, 1 के
शनि=मीन 08°13 ‘ उoभा o , 2 थ
राहू=(व) कुम्भ 14°22 शतभिषा, 3 सी
केतु= (व) सिंह 14°22 पूoफाo 1 मो
============================

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩

राहू काल 12:29 – 13:58 अशुभ
यम घंटा 08:03 – 09:32 अशुभ
गुली काल 11:01 – 12:29 अशुभ
अभिजित 12:06 – 12:53 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:06 – 12:53 अशुभ
प्रदोष 18:24 – 20:52 शुभ

🚩गंड मूल अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन

लाभ 06:35 – 08:03 शुभ
अमृत 08:03 – 09:32 शुभ
काल 09:32 11:01 अशुभ
शुभ 11:01 12:29 शुभ
रोग 12:29 – 13:58 अशुभ
उद्वेग 13:58 – 15:27 अशुभ
चर 15:27 16:55 शुभ
लाभ 16:55 18:24 शुभ

🚩चोघडिया, रात

उद्वेग 18:24 – 19:55 अशुभ
शुभ 19:55 – 21:27 शुभ
अमृत 21:27 – 22:58 शुभ
चर 22:58 24:29* शुभ
रोग 24:29* – 26:00* अशुभ
काल 26:00*27:31* अशुभ
लाभ 27:31* – 29:02* शुभ
उद्वेग 29:02* – 30:34* अशुभ

🚩होरा, दिन

बुध 06:35- 07:34
चन्द्र 07:34 -08:33
शनि 08:33- 09:32
बृहस्पति 09:32- 10:31
मंगल 10:31- 11:30
सूर्य 11:30 -12:29
शुक्र 12:29- 13:29
बुध 13:29 -14:28
चन्द्र 14:28- 15:27
शनि 15:27 -16:26
बृहस्पति 16:26- 17:25
मंगल 17:25- 18:24

🚩होरा, रात

सूर्य 18:24- 19:25
शुक्र 19:25- 20:26
बुध 20:26 -21:27
चन्द्र 21:27- 22:27
शनि 22:27 -23:28
बृहस्पति 23:28 -24:29
मंगल 24:29-25:30
सूर्य 25:30-26:30
शुक्र 26:30-27:31
बुध 27:31-28:32
चन्द्र 28:32-29:33
शनि 29:33-30:34

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

कुम्भ > 05:14 से 06:54 तक
मीन > 06:54 से 08:18 तक
मेष > 08:18 से 09:54 तक
वृषभ > 09:54 से 11:52 तक
मिथुन > 11:52 से 15:18 तक
कर्क > 15:18 से 16:28 तक
सिंह > 16:28 से 18:34 तक
कन्या > 18:34 से 20:54 तक
तुला > 20:54 से 23:16 तक
वृश्चिक > 23:16 से 01:26 तक
धनु > 01:26 से 03:16 तक
मकर > 03:16 से 05:12 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————- उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 8 + 4 + 1 = 28 ÷ 4 = 0 शेष
पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

राहु ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

23 + 23 + 5 = 51 ÷ 7 = 2 शेष

गौरी सान्निधौ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

*शीतलाष्टमी

*रंग जी मंदिर रथोत्सव (वृन्दावन)

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

बंधनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत् ।
दारुभेदनिपुणोऽपिषण्डघ्निर्निष्क्रियोभवति पंकजकोशे ।।
।।चाoनीo।।

दुनिया में बाँधने के ऐसे अनेक तरीके है जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है. इसका उदाहरण वह मधु मक्खी है जो लकड़ी को छेड़ सकती है लेकिन फूल की पंखुडियो को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: कर्मसांख्ययोग अo-5

ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते।
आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः॥

जो ये इन्द्रिय तथा विषयों के संयोग से उत्पन्न होने वाले सब भोग हैं, यद्यपि विषयी पुरुषों को सुखरूप भासते हैं, तो भी दुःख के ही हेतु हैं और आदि-अन्तवाले अर्थात अनित्य हैं। इसलिए हे अर्जुन! बुद्धिमान विवेकी पुरुष उनमें नहीं रमता
॥22॥

 

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