पूनम शर्मा
नेपाल में 2026 के आम चुनावों की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब देश पिछले छह महीनों से अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। गुरुवार सुबह अंतरिम प्रधानमंत्री Sushila Karki ने काठमांडू के धापासी मतदान केंद्र पर अपना वोट डालकर चुनाव प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की। मतदान के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मेरा कर्तव्य पूरा हो गया है।”
यह छोटा सा वाक्य उस लंबी राजनीतिक यात्रा का सार था, जो सितंबर 2025 में शुरू हुई थी जब नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन भड़क उठा था।
जन-जेड आंदोलन से बदली राजनीति
नेपाल में यह चुनाव सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम के तहत नहीं आया। इसकी पृष्ठभूमि सितंबर 2025 में शुरू हुए “जन-जेड आंदोलन” में है, जिसमें बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए थे।
प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए। आंदोलन धीरे-धीरे उग्र होता गया और देश के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने लगे।
आखिरकार इस दबाव के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उनके इस्तीफे के बाद नेपाल की राजनीति में अचानक सत्ता का खालीपन पैदा हो गया। संसद भंग हो चुकी थी और देश को एक ऐसे तटस्थ नेतृत्व की जरूरत थी जो चुनाव तक व्यवस्था संभाल सके।
न्यायपालिका से सत्ता तक
इसी राजनीतिक संकट के बीच एक अप्रत्याशित नाम सामने आया— सुशील कार्की
कार्की पहले ही नेपाल की न्यायिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक पहचान बना चुकी थीं। वह 2016 से 2017 तक नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रह चुकी थीं और इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं।
जन-आंदोलन के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन के नेताओं ने उन्हें एक निष्पक्ष और भरोसेमंद चेहरा मानते हुए अंतरिम नेतृत्व के लिए प्रस्तावित किया। दिलचस्प बात यह रही कि आंदोलन से जुड़े युवाओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिस्कॉर्ड पर एक मतदान भी आयोजित किया, जिसमें कार्की सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर सामने आईं।
राजनीतिक दलों और सेना के साथ बातचीत के बाद उनकी नियुक्ति पर सहमति बनी। 12 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति Ram Chandra Poudel ने कार्की की सिफारिश पर संसद भंग कर दी और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
इस तरह कार्की नेपाल के इतिहास में पहली महिला बनीं जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री—दोनों पदों पर कार्य किया।
शांति और सुधार के वादे
जब कार्की ने पद संभाला, उस समय देश आंदोलन के बाद तनावपूर्ण माहौल में था। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य देश में शांति बहाल करना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और छह महीनों के भीतर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना होगा।
इसी योजना के तहत मार्च 2026 में आम चुनाव कराने की घोषणा की गई। साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को “शहीद” का दर्जा देने की भी घोषणा की, ताकि उनके बलिदान को आधिकारिक मान्यता मिल सके।
घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात
शपथ लेने के अगले ही दिन कार्की ने एक प्रतीकात्मक कदम उठाया। 13 सितंबर को उन्होंने काठमांडू के अस्पतालों का दौरा कर आंदोलन में घायल हुए प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
उन्होंने घायलों से बातचीत की, उनका हाल-चाल जाना और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। बाद में सरकार ने घोषणा की कि घायल प्रदर्शनकारियों को 10 लाख नेपाली रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
हालांकि आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों ने कहा कि केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है और सरकार को दीर्घकालिक समर्थन भी सुनिश्चित करना चाहिए।
प्रशासनिक फैसले और विवाद
कार्की का कार्यकाल केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर कई कठोर फैसले भी लिए।
25 सितंबर को उन्होंने पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई कुछ अव्यवस्थित और विवादित परियोजनाओं को रद्द करने की घोषणा की। साथ ही आंदोलन के दौरान क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए एक पुनर्निर्माण कोष भी स्थापित किया गया।
सड़कों, सार्वजनिक इमारतों और सरकारी सुविधाओं को हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस कोष का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि उनके कुछ फैसलों को लेकर कानूनी चुनौतियाँ भी सामने आईं। अक्टूबर के मध्य तक सर्वोच्च न्यायालय में कम से कम 14 याचिकाएँ दायर की जा चुकी थीं, जिनमें अंतरिम सरकार के अधिकारों और आपात निर्णयों पर सवाल उठाए गए।
चुनाव के साथ खत्म होगा संक्रमण काल
अब जब नेपाल में मतदान शुरू हो चुका है, कार्की का अंतरिम नेतृत्व अपने अंतिम चरण में है। उनका छह महीने का मिशन स्पष्ट था—राजनीतिक संकट के बीच देश को स्थिर रखना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई सरकार के लिए चुनाव कराना।
जन-आंदोलन, प्रधानमंत्री का इस्तीफा, एक पूर्व न्यायाधीश का अंतरिम नेतृत्व और अब राष्ट्रीय चुनाव—इन घटनाओं ने नेपाल की राजनीति को तेजी से बदल दिया है।
धापासी मतदान केंद्र पर वोट डालते हुए सुषिला कार्की का शांत भाव इस बात का संकेत था कि उनका अध्याय लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन नेपाल की नई राजनीतिक कहानी अब शुरू होने जा रही है।