पूनम शर्मा
युद्ध के तीसरे दिन नए दावे और विवाद
ईरान-इजराइल संघर्ष के तीसरे दिन एक नया विवाद सामने आया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। IRGC के अनुसार, जब नेतन्याहू अपने कार्यालय में मीटिंग कर रहे थे, तब उन्होंने हमला किया और चार कमांडरों सहित कई लोगों को मार गिराया।
हालांकि, इजराइल ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय पर कोई हमला नहीं हुआ है और नेतन्याहू पूर्णतया सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल के प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है कि वे ऐसे बंकरों में रहते हैं जहां परमाणु हमले का भी असर नहीं हो सकता।
प्रोपेगेंडा युद्ध और मनोवैज्ञानिक दबाव
यह स्थिति पाकिस्तान के बालाकोट हमले के बाद की याद दिलाती है, जब पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि उन्होंने दिल्ली पर हमला कर दिया है और प्रधानमंत्री मोदी बाल-बाल बचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान भी अपनी जनता और समर्थकों के बीच अपना मनोबल बनाए रखने के लिए इस तरह के दावे कर रहा है।
ईरान ने कहा है कि वे शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने दावों की पुष्टि करेंगे। वहीं, इजराइल ने अपनी तरफ से वीडियो जारी करके दिखाया है कि उन्होंने ईरान के मिसाइल भंडारों को किस तरह नष्ट किया है।
मिसाइल हमले और इंटरसेप्शन
संघर्ष के दौरान ईरान द्वारा दागे गए सैकड़ों मिसाइलों में से अधिकांश को इजराइल के आयरन डोम सिस्टम ने नष्ट कर दिया। दुबई और UAE की सरकार के अनुसार, उन्होंने भी लगभग 200 मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है। कई जगहों पर गिरे मलबे की तस्वीरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास मिसाइलों का भंडार सीमित है और धीरे-धीरे यह क्षमता कम होती जा रही है। अनुमान है कि अगले 2-3 दिनों में ईरान की आक्रामक क्षमता काफी कम हो जाएगी।
क्षेत्रीय प्रभाव और अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप
इस संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को प्रभावित किया है। ईरान ने दुबई, सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों को भी निशाना बनाया है, जिससे उसके पारंपरिक समर्थक भी उससे दूर हो रहे हैं। IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) से पूछा जा रहा है कि क्या इस क्षेत्र में कोई परमाणु विकिरण का खतरा है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि नए लोग बातचीत के लिए तैयार हैं। वहीं, ईरान की जनता में भी शासन परिवर्तन की मांग उठने लगी है।
भारत की सक्रिय भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संकट पर सक्रिय कूटनीतिक पहल की है। उन्होंने देर रात तक कैबिनेट सिक्योरिटी कमेटी (CCS) की बैठक की और इसके बाद नेतन्याहू तथा UAE के नेताओं से फोन पर बात की। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संतुलित रुख अपनाया है।
CCS बैठक में चर्चा हुई कि इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए और तेल की कीमतों में होने वाली वृद्धि से कैसे निपटा जाए। भारत सरकार सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही है।
निष्कर्ष
वर्तमान स्थिति अत्यंत गंभीर है और दोनों पक्षों के बीच प्रचार युद्ध तेज हो गया है। जहां ईरान अपने समर्थकों के बीच मनोबल बनाए रखने के लिए बड़े दावे कर रहा है, वहीं इजराइल सबूतों के साथ अपनी बात रख रहा है। आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।