पूनम शर्मा
दुबई के आसमान में धमाकों की गूंज
दुबई, जिसे लंबे समय से क्षेत्र का सबसे सुरक्षित और स्थिर शहर माना जाता था, अचानक युद्ध की आहट से कांप उठा। देर रात और फिर दिन में आसमान में चमकती रोशनी और तेज धमाकों की आवाज़ों ने लोगों को घरों के अंदर रहने पर मजबूर कर दिया।
रिपोर्टों के अनुसार 200 से अधिक ड्रोन और कई बैलिस्टिक मिसाइलें खाड़ी क्षेत्र की ओर दागी गईं। रक्षा प्रणालियों ने कई को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, लेकिन धमाकों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी।
स्थिति और गंभीर तब हुई जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई पर बड़े हमले की खबर सामने आई। हालांकि तेहरान से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि एक सुरक्षित बैठक स्थल पर सटीक हमले में शीर्ष सैन्य अधिकारी मौजूद थे।
दिनदहाड़े हमला, बदले की कार्रवाई
बताया जा रहा है कि लगभग 30 सटीक बम एक साथ गिराए गए। यह हमला रात में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े किया गया — जो इस तरह की कार्रवाइयों में असामान्य माना जाता है।
हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक अड्डों को निशाना बनाया गया। ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिकी हताहतों का दावा किया, हालांकि वॉशिंगटन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
इज़राइल की रक्षा प्रणाली आयरन डोम पर भी भारी दबाव बताया गया, क्योंकि मिसाइलों की लगातार बौछार को रोकना चुनौतीपूर्ण हो गया।
दुबई एयरपोर्ट पर सन्नाटा
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में से एक है, लगभग ठप हो गया। हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया। हजारों उड़ानें रद्द हुईं।
हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे। होटल भर गए। कई लोग टर्मिनल के फर्श पर रात गुजारने को मजबूर हुए। ईरान, इराक, जॉर्डन, क़तर और यूएई के हवाई क्षेत्र बंद होने से वैश्विक उड्डयन नेटवर्क प्रभावित हुआ।
अनिश्चित भविष्य और वैश्विक असर
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सर्वोच्च नेतृत्व पर हमला सच साबित होता है, तो यह मिडिल ईस्ट की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है। ईरान के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है।
वैश्विक बाजारों में घबराहट देखी जा रही है। तेल की कीमतों में उछाल आया है। निवेशक चिंतित हैं कि यदि संघर्ष लंबा चला, तो इसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
दुबई, जिसे कभी क्षेत्रीय स्थिरता का प्रतीक माना जाता था, अब संघर्ष के केंद्र में दिखाई दे रहा है। आने वाले 24 घंटे निर्णायक हो सकते हैं — क्या कूटनीति जीत पाएगी या युद्ध और फैल जाएगा?
दुनिया की नजरें अब इसी सवाल पर टिकी हैं ।