‘यह क्लीन चिट नहीं ’: रेखा गुप्ता अरविन्द केजरीवाल को मिली राहत पर

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली ,27 फरवरी : दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाल ही में अदालत से मिली राहत पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत द्वारा दी गई राहत को “क्लीन चिट” नहीं माना जा सकता।

रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अदालत का निर्णय एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे पूरी तरह से निर्दोष साबित होने के रूप में पेश करना भ्रामक है। उन्होंने कहा, “यह कहना कि अदालत ने क्लीन चिट दे दी है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा हमेशा से पारदर्शिता और जवाबदेही की पक्षधर रही है। “यदि किसी भी जनप्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो उसका निष्पक्ष जांच और कानूनी परीक्षण होना चाहिए। अदालत से अंतरिम राहत मिलना अंतिम निर्णय नहीं होता,” गुप्ता ने कहा।

उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल को हाल ही में एक मामले में अदालत से राहत मिली है, जिसके बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे बड़ी कानूनी जीत बताया। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय साबित करता है कि उनके नेता के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रेरित थे। हालांकि भाजपा इस दावे से सहमत नहीं है।

रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अदालत के आदेश को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। अगर अदालत ने कोई राहत दी है, तो उसका दायरा स्पष्ट है। इसे राजनीतिक मंच से ‘क्लीन चिट’ बताना जनता को गुमराह करना है।”

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि देश की न्याय व्यवस्था पर सभी को भरोसा रखना चाहिए। “न्यायालय जो भी अंतिम फैसला देगा, वही मान्य होगा। जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक किसी भी प्रकार की विजय घोषणा करना उचित नहीं है,” उन्होंने जोड़ा।

इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। पार्टी का कहना है कि अदालत से मिली राहत उनके आरोपों की पुष्टि करती है कि मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।

दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। फिलहाल, अदालत की कार्यवाही और आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। अंतिम फैसला आने तक यह विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

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