तमिलनाडु :ओ पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल राजनीति में बड़ा उलटफेर

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पूनम शर्मा
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ तब आया जब तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके O. Panneerselvam ने सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam (डीएमके) का दामन थाम लिया। वे 2022 में All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (एआईएडीएमके) से निष्कासित कर दिए गए थे और तब से अपनी राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने की कोशिश में जुटे थे।

चेन्नई में मुख्यमंत्री M. K. Stalin की मौजूदगी में उनका डीएमके में शामिल होना केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते सियासी समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) को कभी एआईएडीएमके सुप्रीमो J. Jayalalithaa का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। जयललिता के निधन के बाद पार्टी में नेतृत्व संघर्ष शुरू हुआ, जिसने धीरे-धीरे एआईएडीएमके को अंदरूनी कलह की ओर धकेल दिया। 2022 में पार्टी से निष्कासन के बाद ओपीएस का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित दिख रहा था।

अब उनका डीएमके में जाना कई स्तरों पर संदेश देता है—पहला, एआईएडीएमके की आंतरिक एकजुटता पर सवाल; दूसरा, डीएमके की रणनीतिक मजबूती; और तीसरा, आगामी चुनावों से पहले विपक्षी खेमे में असंतोष।

2026 चुनाव से पहले बदलेगा समीकरण?

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 2026 की पहली छमाही में प्रस्तावित हैं। 2021 के चुनाव में डीएमके ने 133 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई थी और अपने सहयोगियों के साथ कुल 159 सीटों का आंकड़ा पार किया था। इसके मुकाबले एनडीए गठबंधन को 75 सीटें मिली थीं, जिसमें एआईएडीएमके सबसे बड़ा घटक दल था।

अब ओपीएस का डीएमके में शामिल होना एआईएडीएमके के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। विशेष रूप से दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में उनकी व्यक्तिगत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में डीएमके को अतिरिक्त राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन के लिए चुनौती

फिलहाल भाजपा और एआईएडीएमके गठबंधन 2026 में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है। लेकिन आंतरिक गुटबाजी और पुराने नेताओं के अलग होने से संगठनात्मक मजबूती प्रभावित हुई है। ओपीएस का जाना मनोवैज्ञानिक रूप से भी झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एआईएडीएमके अपने कैडर और नेतृत्व को एकजुट नहीं रख पाई, तो मुकाबला और कठिन हो सकता है।

तीसरा मोर्चा भी तैयार?

राज्य की राजनीति में एक और दिलचस्प पहलू अभिनेता-राजनेता Vijay का राजनीतिक प्रवेश है। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) 2026 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बना सकती है। यदि युवा और शहरी मतदाताओं का एक हिस्सा टीवीके की ओर आकर्षित होता है, तो परंपरागत दलों के समीकरण और जटिल हो जाएंगे।

डीएमके की रणनीति: ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पहले ही “द्रविड़ मॉडल 2.0” के एजेंडे के साथ चुनावी तैयारी का संकेत दे चुके हैं। ओपीएस जैसे अनुभवी नेता को साथ लाकर डीएमके ने यह दिखाया है कि वह केवल वैचारिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी विस्तार की नीति अपना रही है।

हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि डीएमके के मौजूदा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच ओपीएस को किस तरह स्वीकार किया जाता है। राजनीति में पुराने विरोधी का नए साथी बनना हमेशा सहज नहीं होता।

 निष्कर्ष

ओ पन्नीरसेल्वम का डीएमके में शामिल होना तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। यह कदम न सिर्फ एआईएडीएमके के लिए झटका है, बल्कि 2026 के चुनावी परिदृश्य को और अधिक रोमांचक बना सकता है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह दांव डीएमके के लिए कितनी मजबूती लाता है और विपक्ष किस तरह अपनी रणनीति को नया रूप देता है।

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