लंदन में डर का साया: प्रवासी भारतीयों की असुरक्षा

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पूनम शर्मा
लंदन के हैमरस्मिथ स्थित 16 साल पुराने भारतीय रेस्तरां Rangrez का बंद होना सिर्फ एक कारोबारी निर्णय नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीय समुदाय की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहरी चोट है। इसके मालिक हरमन सिंह कपूर ने बार-बार पाकिस्तान मूल के तत्वों और कट्टर खालिस्तानी समर्थकों द्वारा धमकियों, हमलों और ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

अगर कोई कारोबारी, जो दशकों से टैक्स देता रहा हो, स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान करता रहा हो, अचानक यह कहने को मजबूर हो जाए कि “अब यहां रहना और काम करना असंभव है”, तो यह केवल निजी पीड़ा नहीं बल्कि संस्थागत विफलता का संकेत है।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि 2023 में Indian High Commission पर प्रदर्शन और भारतीय ध्वज अपमान की घटना ने पहले ही भारत-ब्रिटेन संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था। ऐसे माहौल में यदि एक सिख उद्यमी—जो स्वयं कट्टरपंथ का विरोध करता है—निशाना बनता है, तो यह सवाल उठता है कि क्या चरमपंथी समूह लोकतांत्रिक समाज की सहिष्णुता का दुरुपयोग कर रहे हैं?

 अभिव्यक्ति की कीमत: जब असहमति अपराध बन जाए

हरमन सिंह कपूर खुले तौर पर खालिस्तानी आंदोलन की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ और पाकिस्तान समर्थित तत्वों की आलोचना की। लोकतांत्रिक देश में यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

लेकिन जब असहमति के जवाब में धमकी, हिंसा, तोड़फोड़ और सामाजिक बहिष्कार होने लगे, तो यह एक खतरनाक प्रवृत्ति बन जाती है। कथित रूप से उनके घर और कार पर हमला हुआ, रेस्तरां पर नकाबपोश लोग पहुंचे, ग्राहकों को डराया गया—ये घटनाएं केवल व्यक्तिगत शत्रुता नहीं, बल्कि भय का वातावरण बनाने की रणनीति प्रतीत होती हैं।

और यदि पुलिस—जैसे कि लंदन की Metropolitan Police—पर निष्क्रियता या असंतुलित कार्रवाई के आरोप लगते हैं, तो यह न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करता है। कानून का सिद्धांत स्पष्ट है: व्यक्ति की पहचान, धर्म या विचारधारा के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।

यदि प्रवासी समुदाय यह महसूस करे कि उन्हें सुरक्षा नहीं मिल रही, तो यह सामाजिक समरसता के लिए गंभीर खतरा है।

समाधान की दिशा: सख्त कानून, कूटनीति और सामुदायिक संवाद

इस पूरे प्रकरण से तीन प्रमुख समाधान निकलते हैं:

(i) कानून का सख्त और निष्पक्ष पालन

ब्रिटेन को यह सुनिश्चित करना होगा कि राजनीतिक शरण या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में हिंसक या धमकीपूर्ण गतिविधियों को संरक्षण न मिले। नफरत फैलाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और धमकी देने वालों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।

(ii) भारत-ब्रिटेन कूटनीतिक समन्वय

भारत और ब्रिटेन के बीच खालिस्तानी मुद्दे पर पहले भी कूटनीतिक संवाद हुआ है। इस संवाद को और संस्थागत बनाना चाहिए ताकि चरमपंथी नेटवर्क की पहचान और निगरानी हो सके।

(iii) प्रवासी समुदाय के भीतर संवाद

सिख समुदाय बहुलतावादी और विविध विचारधाराओं वाला है। कट्टरपंथी तत्व पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते। सामुदायिक नेताओं को आगे आकर यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि हिंसा या धमकी किसी भी विचारधारा का वैध साधन नहीं हो सकती।

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