समग्र समाचार सेवा
दिल्ली 22 फ़रवरी : Constitution Club of India में रविवार को मीरपुर बलिदान भवन समिति के POJK यूथ फोरम द्वारा “संकल्प दिवस एवं POJK यूथ सम्मेलन” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जम्मू कश्मीर पीपुल्स फोरम के सहयोग से आयोजित हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य 22 फरवरी 1994 को भारतीय संसद द्वारा पारित उस ऐतिहासिक
प्रस्ताव को याद करना था, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान से कब्जा खाली करने की मांग की गई थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने की। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील कुमार शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गनाइज़र के संपादक प्रफुल्ल केतकर अतिथि विशिष्ट के तौर पर शामिल हुए। सम्मेलन में मीरपुर, पुंछ और मुजफ्फराबाद से जुड़े युवाओं ने भाग लेकर अपने विचार रखे और प्रस्ताव के समर्थन में संकल्प दोहराया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि 22 फरवरी 1994 को संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी साजिश का मजबूती से सामना करेगा तथा पाकिस्तान को उन क्षेत्रों को खाली करना चाहिए, जिन पर उसने आक्रामकता के माध्यम से कब्जा किया है।
कार्यक्रम के दौरान 1947 में मीरपुर (POJK) से विस्थापन झेलने वाले कुछ वरिष्ठ व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल भारत भूषण गुप्ता और पूर्व न्यायाधीश विद्या भूषण गुप्ता शामिल थे। इन सभी को शॉल ओढ़ाकर सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही फिल्म ‘शतक’ के निर्माता वीर कपूर को भी विशेष अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने 1947 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कबायली हमलावरों के वेश में पाकिस्तानी सेना ने क्षेत्र पर कब्जा किया, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि और विस्थापन हुआ। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक संदर्भ को देश की युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि वे अपने इतिहास और अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
POJK यूथ फोरम के संयोजक शुभम गुप्ता ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए युवाओं से संगठन को मजबूत करने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में समिति के अध्यक्ष डॉ. सुदेश रतन ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से वे 1994 के संसदीय प्रस्ताव के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और विस्थापित समुदाय की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास जारी रखेंगे।