समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली ,16 : फरवरी भारत की राजधानी नई दिल्ली का ‘भारत मंडपम’ आज एक बार फिर वैश्विक कूटनीति और भविष्य की तकनीक के संगम का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच दिवसीय ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का भव्य उद्घाटन किया। यह शिखर सम्मेलन न केवल भारत की तकनीकी बढ़त को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के नियमन और सहयोग के लिए एक नई दिशा भी तय कर रहा है।
नई दिल्ली से विशेष रिपोर्ट: भविष्य की इबारत लिखता भारत
भारत मंडपम, जो अपनी वास्तुकला में भगवान बसवेश्वर के ‘अनुभव मंडपम’ की लोकतांत्रिक भावना को समेटे हुए है, आज दुनिया भर के दिग्गजों से गुलजार रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन भाषण में “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के मंत्र के साथ एआई को मानवीय मूल्यों और समावेशी विकास से जोड़ने पर जोर दिया।
शिखर सम्मेलन की मुख्य झलकियां:
वैश्विक भागीदारी: इस एक्सपो में ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन और अफ्रीका सहित 13 देशों के विशेष पवेलियन बनाए गए हैं। साथ ही, गूगल और ओपनएआई जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ 600 से अधिक स्टार्टअप्स हिस्सा ले रहे हैं।
रणनीतिक रोडमैप: शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एआई गवर्नेंस के लिए एक साझा वैश्विक रोडमैप तैयार करना है, जिसमें नौकरी के संकट और बाल सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होगी।
स्वदेशी ताकत: भारत ने इस अवसर पर 12 स्वदेशी ‘फाउंडेशन एआई मॉडल्स’ का अनावरण किया है, जो 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में काम करने में सक्षम हैं।
विशाल जनसमूह: पांच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 2.5 लाख से अधिक आगंतुकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य: ‘डिजिटल इंडिया’ से ‘एआई फॉर ऑल’ तक
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने 1972 के ‘एशिया 72’ व्यापार मेले से लेकर 2023 के G20 शिखर सम्मेलन तक, हमेशा अपनी तकनीकी और सांस्कृतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। आज का एआई शिखर सम्मेलन उसी विकास यात्रा का अगला चरण है।
संवैधानिक रूप से, अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और निजता का अधिकार) एआई के दौर में और भी प्रासंगिक हो गए हैं। सरकार का ‘इंडिया एआई मिशन’ यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, जो हमारे ‘लोक कल्याणकारी राज्य’ के संवैधानिक संकल्प की पुष्टि करता है।
“एआई का उपयोग केवल आर्थिक विकास के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी सशक्तिकरण के लिए होना चाहिए। भारत आज ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर एआई के लोकतंत्रीकरण का नेतृत्व कर रहा है।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
निष्कर्ष
शिखर सम्मेलन के तीन मुख्य स्तंभ—पीपल (लोग), प्लैनेट (ग्रह), और प्रोग्रेस (प्रगति)—यह स्पष्ट करते हैं कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नियंता (Regulator) बनना चाहता है। जहाँ दुनिया एआई के खतरों से डरी हुई है, वहीं भारत मंडपम से निकल रहा संदेश ‘भरोसेमंद एआई’ की उम्मीद जगाता है।