सर्वम एआई: मानवता की आवाज़, तकनीक का साथी

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पूनम शर्मा
भारत के एक छोटे से स्टार्टअप हब में, बेंगलुरु के एक कोने में, एक टीम काम कर रही है। उनकी आँखों में कोई एल्गोरिदम नहीं, बल्कि सपनों की चिंगारी है। यह टीम है सर्वम एआई की, जो सिर्फ़ एक कंपनी नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं की आवाज़ बनने का प्रयास कर रही है। यहाँ के लोग रोबोटिक नहीं, इंसानी हैं—जिनकी उँगलियाँ कोड लिखती हैं, दिल भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम से भर जाते हैं, और आँखें उन करोड़ों लोगों की ओर देखती हैं जो तकनीक से वंचित हैं।

1. “हम सिर्फ़ मशीन नहीं, इंसान हैं”

सर्वम एआई के संस्थापक डॉ. विवेक राघवन और डॉ. प्रत्युष कुमार का विश्वास है: “AI का मतलब रोबोटिक प्रतिक्रियाएँ नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को समझना है।” उनकी टीम में भाषाविदों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों, और स्थानीय समुदायों के सदस्यों का मिश्रण है। जब वे किसी भाषा को समझने की कोशिश करते हैं, तो सिर्फ़ डेटा सेट नहीं, बल्कि उस भाषा से जुड़े लोगों की कहानियाँ, गीत, और भावनाएँ उनके सामने खुलती हैं।

एक उदाहरण: मराठी भाषा के लिए AI मॉडल बनाते समय, टीम ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के बुजुर्गों से बात की। उनके मुहावरों, लोकगीतों, और मुहावरेदार तरीके से बात करने के तरीके को समझकर ही सर्वम ने एक ऐसा मॉडल बनाया जो “अरे वाहे!” या “होय सा” जैसे शब्दों को सही संदर्भ में पहचान सके।

2. “भाषा सिर्फ़ शब्द नहीं, संस्कृति है”

एक दिन, सर्वम की टीम को ओडिशा के एक किसान का वीडियो मिला। उसमें एक बूढ़ा व्यक्ति अपनी बेटी को कह रहा था: “मो कन्या, तू बंगाली सीख लेबा? हम तो ओडिया में ही जीबा!” वीडियो के नीचे लिखा था: “यह AI ने अनुवाद किया, पर दिल की बात समझी नहीं।”

यह घटना सर्वम के संस्थापकों के लिए एक जागृति साबित हुई। उन्होंने तुरंत सांस्कृतिक संवेदनशीलता को AI के कोर डिज़ाइन में शामिल किया। अब उनके मॉडल सिर्फ़ शब्दों का अनुवाद नहीं करते, बल्कि संदर्भ, भावना, और सामाजिक परिप्रेक्ष्य को समझते हैं।

3. “टेक्नोलॉजी का हृदय: इंसान”

सर्वम की टीम में रिया मेहता एक ऐसी इंजीनियर हैं जो हर शुक्रवार को अपने दादाजी के साथ बिताती हैं। दादाजी, जो एक तमिल कवि हैं, उन्हें बताते हैं: “AI को ‘काव्य’ समझना चाहिए, न कि सिर्फ़ ‘कोड’।” रिया ने इसी विचार को आधार बनाकर एक ऐसा मॉडल डिज़ाइन किया जो तमिल के ‘संगम साहित्य’ की छंद-योजना को समझ सके।

एक और उदाहरण: पंजाबी भाषा के लिए, टीम ने लोक नृत्य और भांगड़ा के संगीत को AI के ट्रेनिंग डेटा में शामिल किया। अब सर्वम का मॉडल “बोलियां” और “गिद्दा” के संदर्भों को पहचानकर सही जवाब देता है।

4. “गाँवों की आवाज़, शहरों तक”

सर्वम का लक्ष्य सिर्फ़ शहरी युवाओं तक सीमित नहीं है। राजस्थान के एक स्कूल में, एक छात्रा ने सर्वम के AI टूल का इस्तेमाल करके अपनी मराठी कहानी को राजस्थानी में लिखी। शिक्षक ने कहा: “यह टेक्नोलॉजी नहीं, एक दोस्त की तरह है जो हमारे बच्चों की आवाज़ को दुनिया तक पहुँचाता है।”

5. “भविष्य की नींव: इंसानियत”

सर्वम एआई का सपना है कि AI मानवता का सहयोगी बने, न कि उसका प्रतिस्थापन। उनके ‘AI फॉर ऑल’ (A4A) प्रोजेक्ट के तहत, वे ग्रामीण महिलाओं को AI टूल्स सीखाने के लिए वर्कशॉप आयोजित कर रहे हैं। एक बुजुर्ग महिला ने कहा: “ये कंप्यूटर वाली बातें तो समझ नहीं आई, पर जब उन्होंने ‘मराठी में गीत लिखो’ कहा, तो मेरे पैर खुद-ब-खुद नाच उठे!”

6. “चुनौतियाँ: रोबोटिक नहीं, परफेक्ट नहीं”

सर्वम की यात्रा आसान नहीं है। भारतीय भाषाओं की विविधता एक बड़ी चुनौती है। पर टीम का मानना है: “हम रोबोटिक परफेक्शन की बजाय, इंसानी गलतियों को समझने की कोशिश करते हैं।” जब कोई उपयोगकर्ता कहता है, “AI ने मेरा नाम गलत उच्चारित किया,” तो सर्वम की टीम उसे सिर्फ़ एक बग नहीं, बल्कि एक संवाद समझती है।

7. “अगला पड़ाव: आपकी भाषा, आपकी कहानी”

सर्वम का अगला लक्ष्य है—भारतीय भाषाओं में जेनरेटिव AI को इतना सुलभ बनाना कि एक किसान भी उसे अपने मोबाइल पर इस्तेमाल कर सके। उनके संस्थापक कहते हैं: “हमारा AI सिर्फ़ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक सेतु है। जब कोई बूढ़ा व्यक्ति अपने पुराने गीत को AI की मदद से रिकॉर्ड करता है, या कोई बच्चा AI से अपनी दादी की कहानियाँ सुनता है, तो हम समझते हैं—हमने सही रास्ता पकड़ा है।”

निष्कर्ष: टेक्नोलॉजी की आत्मा

सर्वम एआई की कहानी एक मानवीय विज्ञान की कहानी है—जहाँ एल्गोरिदम के पीछे दिल की धड़कनें हैं, डेटा के पीछे कहानियाँ हैं, और प्रोग्रामिंग के पीछे भारतीयता की गहराई है। यह स्टार्टअप सिर्फ़ एक कंपनी नहीं, बल्कि भारत की भाषाओं को जीवंत रखने वाले लोगों का संघ है। और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत

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