- न्यूनतम किराए की अधिसूचना: सरकार तुरंत ऐप-आधारित सेवाओं के लिए न्यूनतम आधार किराया तय करे।
- निजी वाहनों पर रोक: व्यावसायिक सवारी के लिए निजी (नॉन-कमर्शियल) वाहनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- पारदर्शी एल्गोरिदम: कंपनियों के किराया निर्धारण और ड्यूटी आवंटन की प्रणाली में पारदर्शिता हो।
- सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएँ दी जाएँ ।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 7 फरवरी, : आज देश के विभिन्न शहरों में ऐप-आधारित टैक्सी और बाइक सेवाओं का उपयोग करने वाले यात्रियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेतृत्व में ओला, उबर और रैपिडो के ड्राइवरों ने सुबह से ही 6 घंटे की देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है।
हड़ताल का मुख्य कारण: मनमाना किराया और निजी वाहनों का दुरुपयोग
ड्राइवर यूनियनों का आरोप है कि ‘मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2025’ लागू होने के बावजूद कंपनियाँ अपनी मनमर्जी से किराया तय कर रही हैं। ड्राइवरों का कहना है कि सरकार द्वारा न्यूनतम आधार किराया (Minimum Base Fare) अधिसूचित न किए जाने के कारण उनकी कमाई में भारी गिरावट आई है।
यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन के अनुसार, “कंपनियाँ एल्गोरिदम के जरिए किराए पर नियंत्रण रखती हैं और ड्राइवरों के मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में काट लेती हैं। ऊपर से निजी नंबर प्लेट (सफेद प्लेट) वाले वाहनों का व्यावसायिक उपयोग हमारे वैध रोजगार के लिए खतरा बन गया है।”
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के चौंकाने वाले आंकड़े
हाल ही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी गिग वर्कर्स की दयनीय स्थिति पर मुहर लगाई है। सर्वे के अनुसार:
भारत में लगभग 40% गिग वर्कर्स की मासिक आय ₹15,000 से भी कम है।
देश में गिग वर्कर्स की संख्या 2021 के 77 लाख से बढ़कर 2025 में 1.2 करोड़ हो गई है।
सर्वे में यह भी सुझाव दिया गया है कि इन श्रमिकों के लिए ‘न्यूनतम प्रति घंटा भुगतान’ प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
यात्रियों पर असर
शनिवार की छुट्टी और काम के दिनों के बीच इस हड़ताल ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में यातायात को प्रभावित किया है। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की है कि उन्हें या तो राइड मिल नहीं रही है, या फिर ‘सर्ज प्राइजिंग’ के कारण किराया दोगुना-तिगुना दिखाया जा रहा है।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियाँ उनकी माँगें नहीं मानती हैं, तो आने वाले समय में विरोध प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा।