राज्यसभा में पीएम मोदी का गर्जना: कांग्रेस पर तीखे वार और ‘विकसित भारत’ का रोडमैप

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पूनम शर्मा
संसद का बजट सत्र हमेशा से गहमागहमी भरा रहता है, लेकिन 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा का नजारा कुछ अलग ही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने खड़े हुए, तो सदन में केवल राजनीति नहीं, बल्कि एक कड़ा विजन और विपक्षी हमलों का करारा जवाब भी देखने को मिला। विपक्ष की नारेबाजी और वॉकआउट के बीच पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार की दिशा और दशा क्या है।

 

सिखों के अपमान और राहुल गांधी पर सीधा प्रहार

भाषण का सबसे भावनात्मक और आक्रामक हिस्सा वह था जब पीएम मोदी ने राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने भाजपा राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार’ कहा था। मोदी ने इसे केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरी सिख कौम का अपमान बताया।

उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “अहंकार जब सातवें आसमान पर होता है, तो इंसान को कुछ दिखाई नहीं देता। कांग्रेस ने बिट्टू को गद्दार सिर्फ इसलिए कहा क्योंकि वे एक सिख हैं। यह सिखों और हमारे गुरुओं के बलिदान का अपमान है।” मोदी ने याद दिलाया कि बिट्टू उस परिवार से आते हैं जिसने देश के लिए शहादत दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विचारधारा बदलने मात्र से कोई गद्दार हो जाता है?

‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ और अतीत के जख्म

पीएम ने विपक्ष के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले नारे पर तंज कसते हुए कहा कि असलियत में ये लोग “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगा रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों से उन्हें हर दिन अपमानित किया गया है, क्योंकि उन्होंने कड़े फैसले लिए—चाहे वह अनुच्छेद 370 हटाना हो, पूर्वोत्तर में शांति लाना हो, या आतंकवादियों के घर में घुसकर मारना हो। उन्होंने यहाँ तक कहा कि सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डालना और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे साहसी कदम उठाने के कारण ही विपक्ष उन्हें निशाना बना रहा है।

 

रक्षा सुधार और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले हमारी सेनाओं के पास जरूरी साजो-सामान की कमी थी। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए बताया कि कैसे सरकार ने संसाधनों के द्वार जवानों के लिए खोल दिए हैं। मोदी ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि अब बिचौलियों का खेल खत्म हो गया है।

अर्थव्यवस्था: ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की तीसरी ताकत तक

आर्थिक मोर्चे पर मोदी ने एक मजबूत तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के लिए एक भरोसेमंद साथी बन चुका है। भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ (कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं) की सूची से निकलकर अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर है।

उन्होंने बैंकिंग सुधारों पर बात करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा कि उन्होंने विरासत में ‘एनपीए’ (NPA) का पहाड़ छोड़ा था, जिसे उनकी सरकार ने पारदर्शिता और विलय के जरिए दुरुस्त किया। प्रधानमंत्री ने गर्व से बताया कि भारत ने यूरोपीय संघ सहित 9 बड़े देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापारिक सौदे किए हैं, जो भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण हैं।

कांग्रेस की विरासत पर सवाल

मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के पुराने भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि उनमें भविष्य की कोई दृष्टि नहीं थी। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देश की जनता को ‘समस्या’ माना, जबकि उनकी सरकार जनता को ‘संपत्ति’ (Asset) मानती है। उन्होंने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने पर कांग्रेस के विरोध की भी आलोचना की।

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की यह दूसरी तिमाही भारत की नींव रखने वाली है। युवा और मध्यम वर्ग इस मिशन के साथ पूरी ताकत से जुड़े हैं। विपक्ष के वॉकआउट के बावजूद मोदी का संदेश स्पष्ट था—रुकावटें आएंगी, लेकिन भारत के विकास का रथ अब थमने वाला नहीं है।

सदन में ऐसे बने हालात, प्रधानमंत्री बोल तक नहीं पाए l

संसद में इन दिनों ‘किताब बनाम किताब’ की राजनीति के तहत जोरदार संग्राम चल रहा है। विपक्ष ने पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की प्रकाशन से दूर एक किताब का हवाला देकर सरकार को चीन और डोकलाम के मुद्दे पर घेरा। इसके जवाब में, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार को निशाना बनाते हुए पुरानी और प्रतिबंधित पुस्तकों की एक “लाइब्रेरी” सदन में लाकर गम्भीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक किताब का संदर्भ दिया, जिसमें लद्दाख गतिरोध (2020) के दौरान की परिस्थितियों का जिक्र है। विपक्षी दलों ने इस किताब के माध्यम से चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाकर सरकार पर सवाल उठाए।

सत्ता पक्ष ने भी पलटवार किया और इसकी कमान तेजतर्रार बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सम्भाली। उन्होंने पलटवार करते हुए एम.ओ. मथाई की किताब, ‘द रेड सारी’, और ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ जैसी कई अन्य पुस्तकों का हवाला दिया। इन पुस्तकों का उपयोग करके कांग्रेस की पुरानी नीतियों और गांधी परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। इसमे नेहरू से लेकर इंदिरा, राजीव तक के जीवन से जुड़े विवादित विषय शामिल हैं। हालांकि विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उधर सरकार ने नियम 349 का हवाला देकर कहा कि सदन में किसी भी ऐसी पुस्तक या दस्तावेज़ का उपयोग नहीं किया जा सकता जो प्रकाशित न हो या जिस पर बहस चल रही हो।

 

इस ‘किताब युद्ध’ के कारण संसद में इतना हंगामा हुआ कि कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब तक दे नही पाए। विपक्ष की महिला सांसदों ने तो प्रधानमंत्री की कुर्सी की ही घेराबंदी कर ली। इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आपत्ति जताई। सियासी आरोप-प्रत्यारोप के कारण बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। यहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए अलग-अलग किताबों का इस्तेमाल कर रहे हैं।। इस प्रकार एक पुस्तक-आधारित राजनीतिक लड़ाई में जनता के मूलभूत मुद्दे नदारद हो गए।

सिख मंत्री को ‘ गद्दार दोस्त ‘ बोलकर फंस गए राहुल गांधी

संसद में राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू को “गद्दार दोस्त” कहने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया घमासान छिड़ गया है। संसद में ताजा ‘संग्राम’ राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू के बीच हुई तीखी बहस से जुड़ा हैं। एक वीडियो सोशल मीडिया पर बुधवार को जमकर वायरल हुआ, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो में संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन कर रहें राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री को ग़द्दार शब्द बोले। जवाब में उन्हें मंत्री ने देश का दुश्मन का कह दिया। केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्व बेअन्तसिंह के पोते है और अब भाजपा ने इसे सिखों के अपमान से जोड़कर देशव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिये। ‘ गद्दार दोस्त ‘ को भी राहुल का एक और ‘ फ़ाउल ‘ करार दिया जा रहा हैं। लिहाजा बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान की आलोचना की है और संसद में उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

 

 

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