सपने न देखना क्राइम है, उन पर दृढ़ रहना जरूरी : पीएम मोदी

परीक्षा पे चर्चा में छात्रों को पीएम मोदी का आत्मविश्वास मंत्र, कर्म और अनुशासन पर दिया जोर

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  • पीएम मोदी बोले– सुविधा का इंतजार नहीं, क्षमता खुद बनानी होती है
  • छोटे गांवों के बच्चे भी संसाधनों के बिना कर रहे बेहतर प्रदर्शन
  • सपनों को सिर्फ गुनगुनाने से नहीं, मेहनत से साकार करने की नसीहत
  • वैदिक मैथ और बायोग्राफी पढ़ने की भी दी सलाह

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 06 फरवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि “सपने न देखना तो क्राइम है, लेकिन उन पर डटे रहना और कर्म करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।” उन्होंने छात्रों को आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास का महत्व समझाया।

सुविधा पहले नहीं, क्षमता पहले

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सोच गलत है कि पहले सुविधाएं मिलेंगी, तभी क्षमता आएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के छोटे-छोटे गांवों के बच्चे सीमित संसाधनों के बावजूद बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

बैलगाड़ी वाले बच्चे का उदाहरण

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर देखे गए एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति बैलगाड़ी में सामान लेकर काम पर जा रहा था और उसका बच्चा उसी सामान के ऊपर बैठकर पूरी तन्मयता से पढ़ाई कर रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बच्चा कंफर्ट की चिंता किए बिना अपने लक्ष्य पर केंद्रित था।

सपनों को लिखो, लेकिन सबको मत बताओ

लद्दाख की एक छात्रा के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े सपने देखना जरूरी है, लेकिन केवल सपनों में खोए रहना काम नहीं आता। उन्होंने कहा, “जहां हूं, वहां सफल होना है—तभी आगे बढ़ूंगा।”

प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि अपने सपनों को लिखकर रखें, उन पर मेहनत करें और हर किसी से साझा करने के बजाय उन पर दृढ़ बने रहें।

बायोग्राफी और वैदिक मैथ पर जोर

प्रधानमंत्री ने छात्रों को अपने रुचि क्षेत्र से जुड़े लोगों की जीवनियां पढ़ने की सलाह दी। गणित की तैयारी से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने वैदिक मैथ को उपयोगी बताते हुए इसे सीखने का सुझाव दिया।

‘एग्जाम वॉरियर्स’ का उल्लेख

छात्रों के मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री द्वारा लिखी गई पुस्तक एग्जाम वॉरियर्स का भी उल्लेख किया गया। इस पुस्तक का उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना और परीक्षाओं को उत्सव के रूप में देखने की सोच विकसित करना है।

परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण

इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा का यह 9वां संस्करण था, जिसमें कक्षा 6 से ऊपर के छात्र, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए। कार्यक्रम के लिए 4 करोड़ 50 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था। इसे देशभर के हजारों विद्यालयों में लाइव दिखाया गया।

कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों, आकाशवाणी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया।

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