अर्जेंटीना की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ फतह करने रवाना होगी भारतीय पर्वतारोहण टीम

साउथ ब्लॉक से रक्षा मंत्री ने दिखाई हरी झंडी, छह अनुभवी पर्वतारोही अभियान में शामिल

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 05 फरवरी: भारतीय पर्वतारोहियों की एक विशेष टीम अर्जेंटीना की सर्वोच्च चोटी माउंट एकांकागुआ पर चढ़ाई के लिए रवाना होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को साउथ ब्लॉक से इस अभियान को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह टीम नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (उत्तरकाशी) और जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (पहलगाम) के अनुभवी पर्वतारोहियों से मिलकर बनी है। अर्जेंटीना स्थित माउंट एकांकागुआ की ऊंचाई लगभग 6,961 मीटर है। यह न केवल दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी है, बल्कि एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी भी मानी जाती है।

“पर्वतारोहण साहस और टीमवर्क की कसौटी”

टीम को रवाना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पर्वतारोहण केवल शारीरिक शक्ति का नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, मानसिक मजबूती और टीमवर्क की भी कड़ी परीक्षा होती है। उन्होंने दोनों पर्वतारोहण संस्थानों के योगदान की सराहना करते हुए टीम को सफलता की शुभकामनाएं दीं।

अभियान में शामिल अनुभवी पर्वतारोही

इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में कुल छह पर्वतारोही भाग ले रहे हैं—

  • कर्नल हेम चंद्र सिंह
  • कैप्टन जी. संतोष कुमार
  • दीप बहादुर साही
  • विनोद गुसाईं
  • नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह
  • हवलदार रमेश कुमार

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह अभियान 6 फरवरी से शुरू होगा और महीने के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण और युवाओं के लिए अहम अनुभव

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस अभियान से प्राप्त अनुभव भविष्य में युवाओं, सेना के जवानों और साहसिक खेलों में रुचि रखने वालों को सुरक्षित व बेहतर प्रशिक्षण देने में सहायक होगा। यह मिशन वैश्विक पर्वतारोहण अभियानों में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

एवरेस्ट फतह का हालिया कीर्तिमान

गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय पर्वतारोहियों की संयुक्त टीम ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह किया था। यह ऐतिहासिक चढ़ाई 23 मई 2025 को पूरी हुई थी, जिसमें भारतीय सेना के जवानों, प्रशिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उस अभियान का नेतृत्व कर्नल अंशुमान भदौरिया और कर्नल हेम चंद्र सिंह ने किया था।

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