युमनाम खेमचंद सिंह बने मणिपुर के मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति शासन हटने के कुछ घंटों बाद ली शपथ

करीब एक साल तक चले राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ, जिसमें युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

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  • लगभग एक वर्ष बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त, नई सरकार का गठन
  • मैतेई, नागा और कुकी समुदाय को साधने की कोशिश, दो डिप्टी सीएम बनाए गए
  • 3 मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बीच नेतृत्व परिवर्तन
  • खेमचंद सिंह का खेल और संगठनात्मक पृष्ठभूमि से राजनीति तक का सफर

समग्र समाचार सेवा
इंफाल | 04 फरवरी: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के कुछ घंटों बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। करीब एक साल तक चले राष्ट्रपति शासन के बाद उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली है। नई सरकार में दो उपमुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया गया है, ताकि सामाजिक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता को मजबूत किया जा सके।

दो डिप्टी सीएम, समुदायों को प्रतिनिधित्व

नई कैबिनेट में नागा समुदाय से लोधी दिखो और कुकी समुदाय से नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नेमचा किपगेन मणिपुर की पहली महिला डिप्टी सीएम बनी हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला राज्य में लंबे समय से जारी सामुदायिक तनाव को कम करने की दिशा में एक संदेश है।

हिंसा की पृष्ठभूमि और सत्ता परिवर्तन

मणिपुर में 3 मई 2023 को चुराचांदपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच झड़प के बाद हिंसा भड़क गई थी। इसके बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने रहे। इसी बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद 12 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

पहली बार इंफाल पहुँचे कुकी-जो विधायक

हिंसा के बाद यह पहला मौका है जब कुकी-जो समुदाय के विधायक—एलएम खौटे और न्गुर्संगलुर सनाते—इंफाल पहुँचे हैं। नई नेतृत्व टीम के स्वागत को लेकर इंफाल स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में तैयारियां की गईं।

विधानसभा अध्यक्ष से मुख्यमंत्री तक

युमनाम खेमचंद सिंह 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं। संगठन के भीतर उन्हें जमीनी स्तर के कुशल आयोजक और मजबूत प्रशासक के रूप में जाना जाता है। मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद, पूर्व सीएम बीरेन सिंह के करीबी माने जाते हैं।

खेल से राजनीति तक का सफर

राजनीति में आने से पहले खेमचंद सिंह व्यवसाय से जुड़े रहे और उससे भी पहले वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खिलाड़ी थे। उन्होंने दक्षिण कोरिया में प्रशिक्षण लिया और भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय ताइक्वांडो टीम के कप्तान और कोच भी रहे हैं।

ब्लैक बेल्ट और खेल प्रशासन

खेमचंद सिंह को सियोल स्थित ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन से 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया। वे ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया में उपाध्यक्ष रहे और पूर्वोत्तर भारत में इस खेल के संस्थागत विकास में योगदान दिया। 2012 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और बाद में भाजपा से जुड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ भी सक्रिय रहे।

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