केंद्रीय बजट 2026-27: 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट, आईटीआर-1 और 2 की डेडलाइन 31 जुलाई

आईटीआर-1 और 2 भरने वालों को बड़ी राहत, डेडलाइन 31 जुलाई तक बढ़ी

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  • 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट
  • आईटीआर-1 और आईटीआर-2 की अंतिम तारीख 31 जुलाई
  • एलआरएस के तहत टीसीएस 5% से घटकर 2%
  • 2026-27 में राजकोषीय घाटा 4.3% रहने का अनुमान

 

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 1 फ़रवरी :  केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करदाताओं को राहत देने वाली कई अहम घोषणाएं कीं। सरकार ने स्पष्ट किया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य टैक्स कानूनों को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है।

आईटीआर फाइलिंग को लेकर बड़ी राहत

वित्त मंत्री ने बताया कि आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इससे वेतनभोगी वर्ग और छोटे करदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा। सरकार का कहना है कि टैक्स फॉर्म को और सरल किया गया है तथा पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है। हालांकि, इस बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया।

2021-22 का वादा पूरा

सरकार ने संसद को अवगत कराया कि 2021-22 में किए गए टैक्स सुधारों के वादे अब पूरे कर दिए गए हैं। बजट अनुमानों के अनुसार,

  • 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% रहने का अनुमान है
  • 2026-27 में यह घटकर 4.3% होने की उम्मीद जताई गई है

सरकार का फोकस वित्तीय अनुशासन के साथ आर्थिक विकास को गति देने पर बना रहेगा।

राज्यों के लिए अनुदान और कर्ज सीमा

बजट में राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। वित्त वर्ष 2027 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये की ग्रांट देने का प्रस्ताव है। साथ ही,
डेट-टू-जीडीपी अनुपात 55.6%
नेट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपये तय की गई है

टीसीएस दरों में कटौती

करदाताओं को एक और बड़ी राहत देते हुए सरकार ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस दर 5% से घटाकर 2% कर दी है। इससे विदेश में शिक्षा या इलाज कराने वाले परिवारों का वित्तीय बोझ कम होगा।

टीडीएस नियमों पर स्थिति साफ

सरकार ने टैक्स नियमों में भ्रम दूर करते हुए स्पष्ट किया कि मानव संसाधन सेवाओं की आपूर्ति को अब ठेकेदारों को किए गए भुगतानों की श्रेणी में माना जाएगा। इसके तहत इन सेवाओं पर 1% या 2% टीडीएस लगेगा, जिससे कारोबारियों और श्रमिकों—दोनों को सुविधा मिलेगी।

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