बजट 2026: इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव, पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़

रोजगार और विकास के लिए बजट 2026 में पूंजीगत खर्च को नई ऊंचाई

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  • पूंजीगत खर्च का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए किया गया
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड स्थापित करने का ऐलान
  • राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा परियोजनाओं पर जोर
  • बजट को तीन ‘कर्तव्यों’ पर आधारित बताया

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 1 फ़रवरी: वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को केंद्र में रखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए करने की घोषणा की। सरकार का मानना है कि इससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड की स्थापना

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बड़ी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड की स्थापना की घोषणा की। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों को कम करना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।

रणनीतिक क्षेत्रों और एमएसएमई पर फोकस

सरकार ने सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही लघु एवं मध्यम उद्यमों को तेजी से विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वैश्विक बाजारों से जुड़ाव पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक बाजारों से गहराई से जुड़ना होगा। निर्यात बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और सार्वजनिक निवेश को संतुलित रखते हुए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर सरकार का फोकस रहेगा।

तीन ‘कर्तव्यों’ पर आधारित बजट

सीतारमण ने बजट 2026-27 को तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित बताया।

  • पहला, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज करना।
  • दूसरा, नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा कर उनकी क्षमता का निर्माण करना।
  • तीसरा, ‘सबका साथ–सबका विकास’ के तहत हर वर्ग और क्षेत्र तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करना।

उन्होंने कहा कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ निरंतर आगे बढ़ रही है और इन कर्तव्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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