40 दिनों में गौ माता को राज्य माता घोषित करें, नहीं तो आंदोलन तेज होगा: शंकराचार्य

संगम स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य का बड़ा ऐलान, 10–11 मार्च को लखनऊ कूच

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  • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया
  • गौ माता को राज्य माता घोषित करने की माँग को लेकर आंदोलन की चेतावनी
  • 10–11 मार्च को संत समाज के साथ लखनऊ पहुँचने का ऐलान
  • संगम स्नान विवाद और संतों से दुर्व्यवहार का मुद्दा फिर उठा

समग्र समाचार सेवा
काशी | 30 जनवरी: प्रयागराज में संगम स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने नई और सख़्त मांगे रख दी हैं। काशी से उन्होंने स्पष्ट किया कि अब प्रशासन से क्षमायाचना की चर्चा पीछे छूट चुकी है और संत समाज आगे की रणनीति के साथ मैदान में उतरने को तैयार है।

40 दिनों का अल्टीमेटम

शंकराचार्य ने कहा कि यदि 40 दिनों के भीतर गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार से जुड़ा प्रश्न है, जिस पर सरकार को ठोस निर्णय लेना होगा।

10–11 मार्च को लखनऊ कूच

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की कि 10 और 11 मार्च को संत समाज के साथ वे लखनऊ पहुँचेंगे और सरकार के समक्ष अपनी माँगें रखेंगे। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में 10–11 दिनों तक अनशन के दौरान भी समाधान के प्रयास हुए, लेकिन अब निर्णय की घड़ी आ चुकी है।

संगम स्नान विवाद की पृष्ठभूमि

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अपने दलबल के साथ पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इस दौरान माघ मेला प्रशासन ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पालकी को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

इस घटना के विरोध में शंकराचार्य 11 दिनों तक अनशन पर रहे और बिना स्नान किए भारी मन से वाराणसी लौट आए।

यूजीसी नियमों पर भी जताया विरोध

शंकराचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्हें न पुष्प वर्षा की चाह है और न ही किसी विशेष सम्मान की अपेक्षा, लेकिन संतों, बटुकों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर प्रशासन को सार्वजनिक रूप से क्षमा मागनी चाहिए।

प्रशासन का प्रस्ताव ठुकराया

सूत्रों के अनुसार, विवाद सुलझाने के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव दिया था कि भविष्य में शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक पालकी में संगम स्नान कराया जाएगा और वरिष्ठ अधिकारी स्वागत के लिए उपस्थित रहेंगे।
हालाकि, शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि इसमें गलती स्वीकार करने और क्षमा माँगने का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि संतों के साथ दुर्व्यवहार हुआ था।

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