अंतरराष्ट्रीय अपमान और घरेलू विश्वासघात के बीच फंसा बांग्लादेश क्रिकेट
खिलाड़ियों से वादा तोड़ा, बोर्ड ने नज़्मुल इस्लाम को फिर सौंप दी वित्त समिति
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टी20 विश्व कप से बाहर होने के कुछ घंटों बाद बोर्ड ने लिया विवादास्पद फैसला
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अपमानजनक बयानों के बाद हटाए गए नज़्मुल इस्लाम की चुपचाप वापसी
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खिलाड़ियों के आंदोलन को बताया जा रहा है “भ्रम में डाला गया समझौता”
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के फैसले से बढ़ी बोर्ड की आलोचना
समग्र समाचार सेवा
ढाका| 26 जनवरी: टी20 विश्व कप से आधिकारिक रूप से बाहर किए जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर बोर्ड ने एम नज़्मुल इस्लाम को पुनः अपनी वित्त समिति का प्रमुख बना दिया। यह कदम राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ किए गए वादों के ठीक उलट माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इक़बाल ने सुझाव दिया कि विश्व कप स्थलों से जुड़े मसलों पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड से बातचीत की जानी चाहिए। इस पर बोर्ड के निदेशक एम नज़्मुल इस्लाम ने सार्वजनिक रूप से तमीम को भारतीय एजेंट कहकर संबोधित किया। इस बयान की आलोचना खुद बोर्ड को भी करनी पड़ी।
खिलाड़ियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ
नज़्मुल यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह तक कहा कि यदि बांग्लादेश विश्व कप से हटता है तो खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार का मुआवज़ा नहीं मिलना चाहिए। इतना ही नहीं, खराब प्रदर्शन की स्थिति में खिलाड़ियों से धन वसूली की बात भी सामने आई। इन टिप्पणियों ने खिलाड़ियों के भीतर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया।
खिलाड़ियों का आंदोलन
क्रिकेटर्स वेलफेयर संघ के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन, नज़्मुल हुसैन शांतो और मेहदी हसन मिराज़ के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने देश की प्रमुख घरेलू प्रतियोगिता का बहिष्कार कर दिया। इस आंदोलन ने बोर्ड को दबाव में ला दिया।
अस्थायी कार्रवाई और भरोसे का भ्रम
प्रसारण से होने वाली आमदनी और प्रतियोगिता को बचाने के उद्देश्य से बोर्ड ने नज़्मुल इस्लाम को उनके वित्तीय पद से हटाने और कारण बताओ नोटिस जारी करने की घोषणा की। खिलाड़ियों को लगा कि बोर्ड ने उनकी गरिमा को महत्व दिया है, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया।
अंतरराष्ट्रीय झटका
घरेलू विवाद शांत होते ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने सख़्त फैसला लिया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत जाने से बांग्लादेश के इनकार को अविश्वसनीय मानते हुए परिषद ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टी20 विश्व कप में शामिल कर लिया।
फिर वही चेहरा, वही कुर्सी
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब बोर्ड ने यह घोषणा की कि नज़्मुल इस्लाम के स्पष्टीकरण को संतोषजनक मान लिया गया है और उन्हें दोबारा वित्त समिति की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले ने खिलाड़ियों के बीच यह संदेश दिया कि बोर्ड व्यवस्था और पुराने चेहरों को बचाने में अधिक रुचि रखता है।
निष्कर्ष
घटनाक्रम से साफ़ है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों की भावनाओं और इच्छाओं को नज़रअंदाज़ किया। विश्व कप से बाहर होने के साथ-साथ अब बोर्ड की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।