दिल्ली से शेख़ हसीना के भाषण पर भड़का बांग्लादेश, भारत पर लगाए गंभीर आरोप
शेख़ हसीना के ऑडियो संदेश पर बांग्लादेश का विरोध, प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर उठा
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दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शेख़ हसीना का रिकॉर्डेड भाषण सुनाया गया
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बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत की भूमिका पर नाराज़गी जताई
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बयान को लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया
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प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन होने का आरोप लगाया गया
समग्र समाचार सेवा
ढाका | 26 जनवरी: भारत की राजधानी दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के रिकॉर्डेड भाषण को लेकर बांग्लादेश में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसे सार्वजनिक रूप से उकसाने वाला क़दम बताते हुए भारत पर असंतोष व्यक्त किया है।
भारत को लेकर नाराज़गी
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में शरण लेकर शेख़ हसीना को इस प्रकार के भाषण देने की अनुमति मिलना हैरानी और निराशा से भरा है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसे वक्तव्य बांग्लादेश के लोकतंत्र, शांति और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग पर आगामी आम चुनाव में भाग लेने पर रोक है, इसके बावजूद उनके समर्थकों को सक्रिय करने वाले संदेश स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं।
दिल्ली के कार्यक्रम में क्या हुआ
शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी इन बांग्लादेश’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार में शेख़ हसीना का रिकॉर्ड किया गया ऑडियो संदेश सुनाया गया। कार्यक्रम के दौरान अवामी लीग की ओर से पाँच सूत्रीय माँगें रखी गईं।
इनमें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में पिछले वर्ष की घटनाओं की निष्पक्ष जाँच, राष्ट्रीय संसदीय चुनाव, बढ़ती भीड़ हिंसा, अल्पसंख्यकों, विपक्षी नेताओं और पत्रकारों पर हमलों का विषय प्रमुख रहा।
यह कार्यक्रम फ़ॉरेन कॉरेसपॉन्डेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया द्वारा आयोजित किया गया था। चुनाव से पहले अवामी लीग के नेता दिल्ली में दो संवाददाता सम्मेलनों को भी संबोधित कर चुके हैं।
प्रत्यर्पण को लेकर भारत पर आरोप
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के तहत कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद भारत ने शेख़ हसीना को बांग्लादेश को नहीं सौंपा है। इससे देश में गहरा असंतोष है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत की भूमि से इस प्रकार के उकसाने वाले वक्तव्य देना द्विपक्षीय संबंधों में बाधा बन सकता है और भविष्य के रिश्तों को जोखिम में डाल सकता है।
मौत की सज़ा और आरोप
पिछले वर्ष 17 नवंबर को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख़ हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां ख़ान कमाल को मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी। दोनों वर्तमान में भारत में रह रहे हैं।
शेख़ हसीना पर जुलाई–अगस्त के दौरान हुए विद्रोह से जुड़े मामलों में आरोप तय किए गए थे। उनकी अनुपस्थिति में मुक़दमे की कार्यवाही हुई। उन्होंने इस निर्णय को राजनीति से प्रेरित बताते हुए अस्वीकार किया था।