समावेशी विकास ही हमारे गणराज्य की असली ताकत: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
नेशन फर्स्ट की भावना से आगे बढ़े देश: गणतंत्र दिवस से पहले राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया
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संविधान, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बताया गणराज्य की आधारशिला
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महिला नेतृत्व वाले विकास, युवा शक्ति और किसानों की भूमिका पर दिया विशेष ज़ोर
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आत्मनिर्भर भारत, तेज़ आर्थिक विकास और मज़बूत राष्ट्रीय सुरक्षा का किया उल्लेख
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25 जनवरी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश और विदेश में रह रहे भारतीयों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, एकता और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से ही भारत का गणराज्य और अधिक सशक्त बन सकता है।
संविधान ने रखी लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव
राष्ट्रपति ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य बना। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श आज भी देश की लोकतांत्रिक आत्मा को दिशा दे रहे हैं।
राष्ट्रीय नायकों को किया नमन
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र एकीकरण में योगदान को याद किया और उनकी 150वीं जयंती से जुड़े आयोजनों का उल्लेख किया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए ‘जय हिंद’ को राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया।
राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग की भूमिका अहम
राष्ट्रपति ने सैनिकों, किसानों, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वच्छता कर्मियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, कलाकारों और युवाओं के योगदान की सराहना की। साथ ही उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत की वैश्विक छवि सशक्त करने वाला बताया।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस और लोकतंत्र की मजबूती
25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने चुनावों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक और प्रेरक संकेत बताया।
महिला नेतृत्व वाला विकास भारत की नई पहचान
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि महिलाएँ आज कृषि, विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल और प्रशासन हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उन्होंने महिला राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
जनजातीय समुदायों के लिए विशेष पहल
उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाओं का ज़िक्र किया।
किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़
राष्ट्रपति ने अन्नदाता किसानों को अर्थव्यवस्था की नींव बताते हुए कहा कि किसानों के कारण देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि सहित कृषि से जुड़ी विभिन्न सहायता योजनाओं की जानकारी दी।
गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाएँ
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना से लगभग 81 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है, जबकि चार करोड़ से अधिक पक्के घर गरीब परिवारों को उपलब्ध कराए गए हैं।
युवा शक्ति से बनेगा विकसित भारत 2047
राष्ट्रपति ने कहा कि देश की युवा आबादी नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के ज़रिये भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रही है। उन्होंने ‘माय भारत’ और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भविष्य की ताकत बताया।
तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत पर ज़ोर
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बुनियादी ढाँचे, जीएसटी सुधार और आत्मनिर्भरता की नीति का उल्लेख किया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा क्षमता
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से देश की सुरक्षा और मज़बूत हुई है।
पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति
राष्ट्रपति ने योग, आयुर्वेद और ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE)’ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया।
‘नेशन फर्स्ट’ के मंत्र के साथ संबोधन समाप्त
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नागरिकों से ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ एकजुट होकर देश को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं और अपने संदेश का समापन “जय हिंद” और “जय भारत” के साथ किया।