विदेशी मरीजों की पहली पसंद बनता एआईआईए गोवा, पंचकर्म से मिल रहा प्रभावी उपचार

आयुर्वेद का वैश्विक केंद्र बन रहा एआईआईए गोवा, विदेशी मरीजों का बढ़ा भरोसा

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  • एआईआईए गोवा में पंचकर्म से न्यूरोलॉजिकल, त्वचा और
    मस्कुलोस्केलेटल रोगों का उपचार
  • रूस, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों से विदेशी मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे
  • ओपीडी में रोजाना 900–1000 मरीजों का उपचार, आईपीडी में 150 बेड की सुविधा
  • पंचकर्म विभाग में प्रतिदिन 100 से 150 मरीजों को दी जा रही चिकित्सा

समग्र समाचार सेवा
पणजी, गोवा। 24 जनवरी: गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) अब देश के साथ-साथ विदेशों से आने वाले मरीजों के लिए भी आयुर्वेदिक उपचार का भरोसेमंद केंद्र बनता जा रहा है। एआईआईए गोवा में उपलब्ध पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के जरिए न्यूरोलॉजिकल, त्वचा, हड्डी और मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, जिससे विदेशी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

पंचकर्म: आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपचार प्रणाली

डीडी न्यूज़ से बातचीत में पंचकर्म विभाग के प्रमुख डॉ. प्रवीण ने बताया कि पंचकर्म आयुर्वेद की एक वैज्ञानिक और विस्तृत चिकित्सा पद्धति है, जिसमें रोग के मूल कारणों पर काम किया जाता है।उन्होंने कहा कि पंचकर्म के अंतर्गत 100 से अधिक प्रकार की प्रक्रियाएँ शामिल हैं और मरीज की बीमारी व शारीरिक प्रकृति के अनुसार उपचार निर्धारित किया जाता है। एआईआईए गोवा में न्यूरोलॉजिकल विकारों के मरीज बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं, वहीं हड्डी, मांसपेशी रोग और मधुमेह के मामलों में भी पंचकर्म से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।

विदेशी मरीजों के बीच बढ़ती लोकप्रियता

डॉ. प्रवीण के अनुसार एआईआईए गोवा विदेशी मरीजों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने बताया कि रूस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों से बड़ी संख्या में मरीज यहाँ इलाज के लिए आ रहे हैं। विदेशी मरीज मुख्य रूप से न्यूरोलॉजिकल रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और मस्कुलोस्केलेटल विकारों के उपचार के लिए पंचकर्म को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ओपीडी और आईपीडी में रोजाना हो रहा व्यापक उपचार

संस्थान की चिकित्सा क्षमता के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. प्रवीण ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन करीब 900 से 1000 मरीजों का इलाज किया जाता है। वहीं 150 बेड की आईपीडी सुविधा उपलब्ध है, जिसमें सामान्यतः 70 से 80 प्रतिशत बेड भरे रहते हैं। पंचकर्म विभाग में प्रतिदिन 100 से 150 मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

रूस की नतालिया को पंचकर्म से मिली राहत

एआईआईए गोवा में उपचार कराने वालों में रूस की 63 वर्षीय नतालिया भी शामिल हैं। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर नतालिया पिछले आठ वर्षों से जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और ऑप्टिक एट्रोफी जैसी समस्याओं से पीड़ित थीं। वर्तमान में वह डॉ. प्रवीण और डॉ. चिंतामणि की देखरेख में उपचार करा रही हैं।

नतालिया ने बताया कि पंचकर्म और आयुर्वेदिक औषधियों से उनकी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है और इलाज का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।

पारंपरिक आयुर्वेद और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय

एआईआईए गोवा में पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के समन्वय से न केवल मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय आयुर्वेद की साख और विश्वसनीयता भी मजबूत हो रही है।

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