राजस्थान में गुजरात मॉडल जैसा कानून लाने की तैयारी, दंगाग्रस्त इलाकों में संपत्ति सौदे पर सख्ती

बीजेपी सरकार के नए प्रस्तावित कानून से ‘अशांत क्षेत्रों’ में घर-जमीन की खरीद–फरोख्त पर लगेगी रोक, बिना अनुमति लेन-देन होगा अवैध

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समग्र समाचार सेवा
जयपुर | 22 जनवरी: राजस्थान की बीजेपी सरकार ने गुजरात की तर्ज पर एक नया सख्त कानून लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य कैबिनेट ने बुधवार को एक अहम विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सरकार किसी भी इलाके को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकेगी। ऐसा होने पर वहाँ बिना प्रशासनिक अनुमति घर, जमीन या अन्य अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री संभव नहीं होगी।

इस विधेयक का नाम ‘द राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल-2026’ रखा गया है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लोगों को मजबूरी में सस्ती दरों पर संपत्ति बेचने से बचाना और किरायेदारों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।सरकार इस विधेयक को विधानसभा के बजट सत्र में पेश करेगी। यदि यह कानून बनता है, तो राजस्थान गुजरात के बाद ऐसा कानून लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य होगा।

सरकार की दलील

कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि जिन इलाकों में हिंसा, भीड़ का उपद्रव, कानून-व्यवस्था की समस्या या जनसंख्या संतुलन में असामान्य बदलाव देखा जाएगा, उन्हें ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में एक समुदाय की आबादी तेजी से बढ़ने के कारण सामाजिक संतुलन और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में स्थायी निवासियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे दंगे और सार्वजनिक अशांति की आशंका बढ़ जाती है।मंत्री के अनुसार, दंगों से प्रभावित इलाकों में लोग अक्सर दबाव या डर के कारण अपनी संपत्ति बेहद कम कीमत पर बेचने को मजबूर होते हैं। प्रस्तावित कानून में ऐसे मामलों को गंभीर अपराध माना गया है, जिनमें सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

विधेयक की मुख्य बातें एक नजर में

  • सरकार किसी भी संवेदनशील इलाके को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकेगी।
  • अशांत क्षेत्र में जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना संपत्ति की खरीद-बिक्री अवैध होगी।
  • कानून का उल्लंघन संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा।
  • दोषी पाए जाने पर तीन से पाँच साल की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान।
  • अलग-अलग समुदायों के बीच संपत्ति लेन-देन के लिए अनुमति जरूरी होगी, जबकि एक ही समुदाय के भीतर सौदों पर यह शर्त लागू नहीं होगी।
विपक्ष का विरोध

इस विधेयक को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर हमला बताया। उनका कहना है कि यह कानून डर का माहौल बनाने और नौकरशाही को असीमित अधिकार देने की कोशिश है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए गुजरात मॉडल को राजस्थान में लागू करना चाहती है, जिससे राज्य की शांति और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचेगा।

कारोबार और रियल एस्टेट की चिंता

उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि यदि यह कानून लागू हुआ तो जयपुर समेत बड़े शहरों में जमीन-मकान के कारोबार, निवेश, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें विधानसभा के बजट सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है या नहीं।

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