राज ठाकरे ने बड़े भाई उद्धव को दिया बड़ा सियासी झटका

कल्याण–डोंबिवली में सत्ता संतुलन बदलने के संकेत, शिंदे सेना और मनसे की नज़दीकी से राजनीतिक सरगर्मी तेज

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे के बीच नज़दीकी बढ़ी
  • शिंदे गुट और मनसे के संभावित तालमेल को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है
  • कोंकण भवन में शिंदे गुट के सांसदों और मनसे नेता की मौजूदगी से गठजोड़ की चर्चाओं को बल मिला
  • महायुति के पास बहुमत होने के बावजूद महापौर पद को लेकर शिवसेना और भाजपा में खींचतान जारी

समग्र समाचार सेवा
कल्याण/मुंबई,21 जनवरी: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे परिवार के भीतर सियासी दूरियां खुलकर सामने आ गई हैं। कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच बढ़ती नज़दीकियों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

कल्याण–डोंबिवली में बदले राजनीतिक समीकरण

भले ही मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर अभी तस्वीर साफ न हो, लेकिन कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में सत्ता का खेल लगभग तय माना जा रहा है। हालिया चुनाव नतीजों के बाद यहां महापौर पद के लिए नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए शिंदे गुट और मनसे के बीच तालमेल की तैयारी हो चुकी है।

कोंकण भवन दौरे से बढ़ी चर्चाएं

इस सियासी हलचल को उस वक्त और बल मिला, जब शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे और नरेश म्हस्के ने नवी मुंबई स्थित कोंकण भवन का दौरा किया। इस दौरान मनसे नेता राजू पाटिल की मौजूदगी ने दोनों दलों के बीच संभावित गठजोड़ की अटकलों को और हवा दे दी।

मनसे का संगठनात्मक फैसला

इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने संगठन स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए प्रल्हाद म्हात्रे को कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में पार्टी का नया गुटनेता नियुक्त किया है। महानगरपालिका में मनसे के कुल पांच नगरसेवक चुने गए हैं और अब उनका नेतृत्व प्रल्हाद म्हात्रे करेंगे। इसे शिंदे गुट के साथ संभावित सत्ता साझेदारी की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

संख्या बल के बावजूद खींचतान

कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में शिवसेना ने 53 और भारतीय जनता पार्टी ने 50 सीटें जीतकर कुल 103 सीटों पर कब्जा किया है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 62 है। इसके बावजूद महायुति के भीतर महापौर पद को लेकर खींचतान सामने आ गई है। इसी कारण शिंदे गुट को मनसे के समर्थन की जरूरत महसूस हो रही है।

नरेश म्हस्के के बयान से मिले संकेत

शिवसेना शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने मनसे के साथ आने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि चुनाव शिवसेना–भाजपा महायुति के रूप में लड़ा गया है और सत्ता भी उसी रूप में स्थापित की जाएगी।

मनसे को साथ लेने की जरूरत पर उन्होंने कहा,
“अगर विकास के लिए सभी दल साथ आ रहे हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। मनसे कोई ऐसी पार्टी नहीं है जिसे किनारे कर दिया जाए। शहर स्तर पर विकास की राजनीति होती है और उसमें साथ आना स्वाभाविक है।”

ठाकरे गुट के नगरसेवकों पर भी नजर

जब ठाकरे गुट के नगरसेवकों के टूटने को लेकर सवाल किया गया तो नरेश म्हस्के ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी का पता नहीं है, लेकिन नए नगरसेवकों पर सभी दलों की नजर होना सामान्य बात है।

उद्धव ठाकरे के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किल

कल्याण–डोंबिवली में शिंदे सेना और मनसे की बढ़ती नज़दीकी ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय निकाय की राजनीति में पारिवारिक रिश्तों से ज्यादा राजनीतिक मजबूरी और सत्ता की गणित अहम हो गई है। यह घटनाक्रम न केवल उद्धव ठाकरे गुट के लिए झटका है, बल्कि आने वाले महानगरपालिका चुनावों से पहले बड़े राजनीतिक संकेत भी दे रहा है।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.