भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता जल्द संभव-उर्सुला वॉन डेर लेयेन
गणतंत्र दिवस से पहले भारत–ईयू संबंधों में आ सकता है निर्णायक मोड़
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ईयू अध्यक्ष ने भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के संकेत दिए
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समझौते से यूरोपीय संघ को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बढ़त मिलने की उम्मीद
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भारत और ईयू को संयुक्त रूप से विशाल उपभोक्ता बाजार तक पहुँच
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत–ईयू शिखर वार्ता अहम मानी जा रही
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली |21जनवरी: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुँचे गई है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते के करीब हैं, जिसे अब तक का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक करार माना जा रहा है।
दावोस से भारत तक की कड़ी
विश्व आर्थिक मंच की बैठक को संबोधित करते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बताया कि सम्मेलन के तुरंत बाद वह भारत यात्रा पर आएंगी। उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी पहलुओं पर चर्चा बाकी है, लेकिन दोनों पक्षों की मंशा स्पष्ट है और समझौते की दिशा तय हो चुकी है।
विशाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ईयू अध्यक्ष के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह व्यापार करार वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। इससे यूरोप को तेजी से उभरते क्षेत्रों में पहले कदम रखने का अवसर मिलेगा और भारत को भी अपने निर्यात को नई गति देने का मौका मिलेगा।
गणतंत्र दिवस पर विशेष उपस्थिति
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसी दौरान भारत–यूरोपीय संघ शिखर वार्ता आयोजित की जाएगी, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।
वर्षों पुरानी बातचीत अब अंतिम मोड़ पर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत पहली बार वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। कई कारणों से यह प्रक्रिया लंबे समय तक रुकी रही, लेकिन वर्ष 2022 में दोबारा शुरू हुई वार्ता अब अपने अंतिम चरण में है।
अमेरिका और चीन की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सख्त शुल्क नीतियों और चीन के बढ़ते औद्योगिक प्रभुत्व ने भारत और यूरोपीय संघ को एक-दूसरे के और करीब आने के लिए प्रेरित किया है। यूरोप जहां तकनीकी निर्भरता को लेकर सतर्क है, वहीं भारत को सस्ते आयात से अपने उद्योगों की रक्षा करनी है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
भारत इस समझौते के माध्यम से वस्त्र, जूते, रत्न और आभूषण जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों में यूरोपीय बाजार तक आसान पहुँच चाहता है। दूसरी ओर, यूरोपीय देश वाहन उद्योग और पेय पदार्थों के लिए भारतीय बाजार में अवसर देख रहे हैं।
वार्ता में बड़ी प्रगति
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, दोनों पक्ष अधिकांश अध्यायों पर सहमति बना चुके हैं और लक्ष्य है कि उच्चस्तरीय दौरे से पहले समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए।