आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: टिप्पणियों को हल्के में न लें
हमले में चोट या मौत होने पर नगर निकाय के साथ डॉग फीडर्स की भूमिका की भी होगी जाँच
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कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, डॉग फीडर्स भी जिम्मेदारी से नहीं बचेंगे
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कोर्ट बोला—पिछली टिप्पणियां मजाक नहीं, हम गंभीर हैं
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मेनका गांधी की टिप्पणियों और आचरण पर बेंच ने जताई नाराजगी
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निजी पक्षों की दलीलें पूरी कर जल्द सुनवाई समाप्त करने का संकेत
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 जनवरी: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी हमले में किसी व्यक्ति को गंभीर चोट आती है या जान जाती है, तो केवल नगर निकाय ही नहीं, बल्कि डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि उसकी पिछली टिप्पणियों को हल्के में लेना गलत होगा—अदालत इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से देख रही है।
व्यवस्था की विफलता पर कड़ी टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता उजागर हुई है। ऐसे में कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा। बेंच ने संकेत दिया कि निजी पक्षों की दलीलें पूरी कर सुनवाई शीघ्र समाप्त की जाएगी, जिसके बाद राज्यों को अपना पक्ष रखने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा।
मेनका गांधी पर अदालत की नाराजगी
सुनवाई के दौरान बेंच ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से जुड़े पहलुओं पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने उनके वकील से पूछा कि जब वह कोर्ट से संयम बरतने की बात कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने अपनी मुवक्किल के सार्वजनिक बयानों, पॉडकास्ट और बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दिया है। बेंच के अनुसार, अदालत के आदेशों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियाँ अवमानना के दायरे में आती हैं, हालांकि उदारता दिखाते हुए फिलहाल कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जा रही।
बजट और जिम्मेदारी पर सवाल
जस्टिस संदीप मेहता ने यह भी पूछा कि जब मेनका गांधी केंद्रीय मंत्री थीं, तब आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए किस प्रकार के बजटीय प्रावधान किए गए थे। वकील की ओर से इसे नीतिगत विषय बताया गया। इस दौरान एक टिप्पणी पर जस्टिस विक्रम नाथ ने सख्त लहजे में कहा कि अजमल कसाब ने कभी अदालत की अवमानना नहीं की थी—संकेत साफ था कि कोर्ट अपने आदेशों और गरिमा को लेकर किसी भी तुलना को स्वीकार नहीं करेगा।
क्या आगे होगा?
अदालत के रुख से स्पष्ट है कि वह आवारा कुत्तों के मुद्दे पर ठोस जवाबदेही तय करने की दिशा में बढ़ रही है। आने वाले चरण में राज्यों से जवाब मांगा जाएगा और नगर निकायों के साथ-साथ निजी भूमिकाओं की भी कसौटी परखने के संकेत दिए गए हैं।