गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड का प्रस्ताव, पीएम मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति का निमंत्रण

मध्य पूर्व शांति प्रयास तेज, पीएम मोदी को वैश्विक मंच पर नेतृत्व का प्रस्ताव

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  • भारत की भूमिका को वैश्विक शांति प्रयासों में महत्वपूर्ण बताया गया
  • गाजा में स्थायी शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव
  • पीएम मोदी को औपचारिक पत्र लिखकर शामिल होने का निमंत्रण
  • 20-सूत्रीय रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का हवाला

     

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 19 जनवरी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा के लिए प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड का हिस्सा बनने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए यह एक साहसिक और दूरदर्शी पहल है, जिसमें भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

20-सूत्रीय रोडमैप का उल्लेख

प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 29 सितंबर 2025 को गाजा संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक व्यापक 20-सूत्रीय योजना सामने रखी गई थी। इस रोडमैप को अरब देशों, इजराइल और यूरोप के कई प्रमुख नेताओं का समर्थन प्राप्त हुआ। आगे चलकर 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव संख्या 2803 को भारी बहुमत से पारित कर इस पहल का समर्थन किया।

अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड की रूपरेखा

पत्र के अनुसार, अब इस योजना को व्यवहार में लाने की दिशा में कदम बढ़ाने का समय आ गया है। इसके तहत एक शक्तिशाली “शांति बोर्ड” की स्थापना का प्रस्ताव है, जो एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और अस्थायी शासकीय व्यवस्था के रूप में कार्य करेगा। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में प्रभावी शासन, स्थिरता और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करना होगा।

चुनिंदा देशों को नेतृत्व की जिम्मेदारी

व्हाइट हाउस ने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस मंच पर केवल वही देश और नेता शामिल होंगे, जो शांति स्थापना की जिम्मेदारी उठाने और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए ठोस योगदान देने को तैयार हैं। जल्द ही ऐसे साझेदार देशों की एक बैठक आयोजित किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

अमेरिकी राजदूत का बयान

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस पत्र को साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि गाजा में स्थायी शांति और समृद्धि की दिशा में यह शांति बोर्ड एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है और इसमें भारत की भागीदारी वैश्विक स्तर पर संतुलन और विश्वास को मजबूत करेगी।

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