19 जनवरी दैनिक राशिफल एवं पंचांग

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

🐏मेष
शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आंखों का विशेष ध्यान रखें। चोट व रोग से बचाएँ । चिंता रहेगी। घर में मेहमानों का आगमन होगा। व्यय होगा। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🐂वृष
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। जुए व सट्टे से दूर रहें। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा काम होने से उत्साह व प्रसन्नता में वृद्धि होगी। जीवन सुखमय रहेगा। अपरिचितों पर अतिविश्वास न करें। किसी अनहोनी होने का भय सताएगा।

👫मिथुन
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। पुराना रोग उभर सकता है। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। चिंता तथा निराशा हावी रहेंगी। बेकार बातों पर ध्यान न दें। आय में निश्चितता रहेगी। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें।

🦀कर्क
जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल रहेगी। नौकरी में मातहतों का साथ रहेगा। व्यापार अच्छा चलेगा। जल्दबाजी न करें। रुके कामों में गति आएगी। कीमती वस्तु गुम हो सकती है। चोट व रोग से बचें। आशंका-कुशंका से बाधा संभव है।

🐅सिंह
सुख के साधन जुटेंगे। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। नए कार्य करने का मन बनेगा। भाइयों का सहयोग मिलेगा। उत्साह वृद्धि होगी। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। सावधानी आवश्यक है। भाग्य साथ है। अपने काम पर ध्यान दें। शत्रुओं का का पराभव होगा।

🙍‍♀️कन्या
वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका मिलेगा। परिवार व मित्रों के साथ जीवन सुखमय गुजरेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। अध्ययन में मन लगेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। बेचैनी रहेगी। व्यस्तता के चलते थकान हो सकती है। व्यापार में लाभ के योग हैं।

⚖️तुला
नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। राजकीय कोप भुगतना पड़ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। किसी अपने के व्यवहार से मन को ठेस पहुंच सकती है। दूसरों के उकसावे में न आएं। व्यापार धीमा चलेगा।

🦂वृश्चिक
व्यवसाय में उतार-चढ़ाव रहेगा। आय बनी रहेगी। गृह क्लेश हो सकता है। पार्टनरों से मतभेद संभव है। कुसंगति से हानि होगी। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। क्रोध व उत्तेजना से समस्या बढ़ सकती है। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। तनाव रहेगा। मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

🏹धनु
आय में वृद्धि होगी। व्यापार में वृद्धि होगी। अज्ञात भय सताएगा। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। जल्दबाजी न करें। अच्छी बात भी लोगों को समझ नहीं आएगी। विरोध होगा। जीवन सुखमय करने के लिए व्यय होगा। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। सामाजिक कार्य में मन लगेगा। मान-सम्मान मिलेगा।

🐊मकर
पूजा-पाठ में मन लगेगा। शत्रुओं का पराभव होगा। लेन-देन में सावधानी रखें। आय में वृद्धि होगी। कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। शुभ समय। शारीरिक कष्ट संभव है। विवाद में न पड़ें। क्लेश होगा। बेचैनी रहेगी।

🍯कुंभ
सुख के साधन जुटेंगे। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यवसाय ठीक चलेगा। नई योजना बनेगी। समाज में मान-सम्मान मिलेगा। कोई बड़ी मुश्किल का हल मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। जीवनसाथी की चिंता रहेगी। शत्रुभय रहेगा।

🐟मीन
व्यापार से अधिक लाभ होगा। नौकरी में प्रशंसा मिलेगी। उत्साह वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बेचैनी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यस्तता के चलते स्वयं का ध्यान नहीं रख पाएंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

—दिनाँक:-19/01/2026,सोमवार
प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष,
माघ
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि——— प्रतिपदा 26:13:33. तक
पक्ष————————– शुक्ल
नक्षत्र——- उत्तराषाढा 11:51:20
योग————— वज्र 20:44:13
करण——– किन्स्तुघ्न 13:50:16
करण————— बव 26:13:33
वार———————— सोमवार
माह————————– माघ
चन्द्र राशि—————— मकर
सूर्य राशि——————– मकर
रितु————————- शिशिर
आयन————–‐—– उत्तरायण
संवत्सर——————- विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर)————– सिद्धार्थी
विक्रम संवत—————- 2082
गुजराती संवत————– 2082
शक संवत—————— 1947
कलि संवत—————— 5126

वृन्दावन
सूर्योदय—————- 07:11:47
सूर्यास्त———-‐—— 17:48:17
दिन काल————– 10:36:29
रात्री काल————– 13:23:18
चंद्रास्त—————– 18:20:22
चंद्रोदय—————– 31:31:00

लग्न—- मकर 4°45′ , 274°45′

सूर्य नक्षत्र————– उत्तराषाढा
चन्द्र नक्षत्र————— उत्तराषाढा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

जी—- उत्तराषाढा 11:51:20

खी—- श्रवण 18:12:10

खू—- श्रवण 24:31:32

खे—- श्रवण 30:49:27

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मकर 04°16 , उoषाo 3 जा
चन्द्र= मकर 07°30 , उoषाo 4 जी
बुध = धनु 03°52 ‘ उ oषाo 2 भो
शु क्र= मकर 07°05, उoफाo 4 जी
मंगल= मकर 02°03 ‘ उoषाo 2 भो
गुरु= मिथुन 24°33 पुनर्वसु, 2 को
शनि=मीन 03°13 ‘ पूo भा o , 4 दी
राहू=(व) कुम्भ 17°04 शतभिषा, 4 सू
केतु= (व) सिंह 17°04 पूoफाo 2 टा
============================

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩

राहू काल 08:31 – 09:51 अशुभ
यम घंटा 11:10 – 12:30 अशुभ
गुली काल 13:50 – 15:09 अशुभ
अभिजित 12:09 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 12:51 – 13:34 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:59 – 15:41 अशुभ
वर्ज्यम 16:05 – 17:47 अशुभ
प्रदोष 17:48 – 20:32 शुभ

💮चोघडिया, दिन

अमृत 07:12 – 08:31 शुभ
काल 08:31 09:51 अशुभ
शुभ 09:51-11:10 शुभ
रोग 11:10-12:30 अशुभ
उद्वेग 12:30 – 13:50 अशुभ
चर 13:50 15:09 शुभ
लाभ 15:09 16:29 शुभ
अमृत 16:29 17:48 शुभ

🚩चोघडिया, रात

चर 17:48 19:29 शुभ
रोग 19:29 – 21:09 अशुभ
काल 21:09 22:50 अशुभ
लाभ 22:50 – 24:30* शुभ
उद्वेग 24:30* – 26:10* अशुभ
शुभ 26:10* – 27:51* शुभ
अमृत 27:51* – 29:31* शुभ
चर 29:31*- 31:12* शुभ

💮होरा, दिन

चन्द्र 07:12 -08:05
शनि 08:05 -08:58
बृहस्पति 08:58- 09:51
मंगल 09:51- 10:44
सूर्य 10:44- 11:37
शुक्र 11:37- 12:30
बुध 12:30 -13:23
चन्द्र 13:23 -14:16
शनि 14:16- 15:09
बृहस्पति 15:09- 16:02
मंगल 16:02 -16:55
सूर्य 16:55 -17:48

🚩होरा, रात

शुक्र 17:48- 18:55
बुध 18:55- 20:02
चन्द्र 20:02- 21:09
शनि 21:09- 22:16
बृहस्पति 22:16- 23:23
मंगल 23:23- 24:30
सूर्य 24:30-25:37
शुक्र 25:37-26:44
बुध 26:44-27:51
चन्द्र 27:51-28:58
शनि 28:58-30:05
बृहस्पति 30:05-31:12

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

मकर > 06:58 से 08:34 तक
कुम्भ > 08:34 से 10:14 तक
मीन > 10:14 से 11:38 तक
मेष > 11:38 से 13:14 तक
वृषभ > 13:14 से 15:12 तक
मिथुन > 15:12 से 17:38 तक
कर्क > 17:38 से 19:48 तक
सिंह > 19:48 से 221:58 तक
कन्या > 21:58 से 00:24 तक
तुला > 00:24 से 02:26 तक
वृश्चिक > 02:26 से 04:46 तक
धनु > 05:46 से 06:54 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

1 + 2 + 1 = 4 ÷ 4 = 0 शेष
पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

1 + 1 + 5 = 7 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* गुप्त नवरात्रि प्रारंभ

*सर्वार्थ सिद्धि योग 11:51 से

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

दह्यमानाः सुतीब्रेण नीचाः परयशोऽग्निना ।
अशक्तास्तत्पदं गन्तुं ततो निन्दां प्रकुर्वते ।।
।।चाoनीo।।

जो नीच लोग होते है वो दुसरे की कीर्ति को देखकर जलते है. वो दुसरे के बारे में अपशब्द कहते है क्यों की उनकी कुछ करने की औकात नहीं है.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: ज्ञानकर्मसन्यासयोग अo-4

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते॥

कर्मों के फल में मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते- इस प्रकार जो मुझे तत्व से जान लेता है, वह भी कर्मों से नहीं बँधता
॥14॥———————————————-
आचार्य ज्योतिष सचिन पांडे

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.